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शतरंज के बादशाह विश्वनाथन आनंद को जन्मदिन पर बधाई दें

Tue, 11 Dec 2012 10:03 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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विश्वनाथ आनंद, शतरंज की दुनिया का ऐसा नाम जिसे दुनिया सलाम करती है। इस खिलाड़ी की उपलब्धियों पर हर भारतीय गौरवान्वित महसूस करता है। समूची दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले शतरंज के इस महान खिलाड़ी का आज (11 दिसंबर) जन्मदिन है।
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विश्वनाथन आनंद अपने प्रशंसकों में 'मद्रास टाइगर' और 'विशी' नाम से बेहद लोकप्रिय हैं। पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन (2000, 2007, 2008, 2010, 2012) विश्वनाथन आनंद का जन्म 11 दिसंबर, 1969 को तमिलनाडु के छोटे से शहर मयिलाडुथराई में हुआ था। बाद में आनंद का परिवार चेन्नई शिफ्ट हो गया। उनके पिता विश्वनाथ दक्षिण रेलवे में रिटायर्ड जनरल मैनेजर हैं।

आनंद का कहना है, 'छह साल की उम्र में मैंने पहली बार शतरंज खेलना शुरू किया। मेरी मां ने मुझे शतरंज की बुनियादी बातें सिखाई। उसी दौरान थोड़े समय के लिए हमलोग फिलीपींस गए थे। वहां टीवी पर पहेली (पजल) का रोचक कार्यक्रम आता था। जब मैं स्कूल चला जाता तो मेरी मां पहेली नोट कर लेती थी, बाद में हम दोनों मिलकर उसे सुलझाते। पहेली सुलझाने में मुझे बेहद मजा आता था। मैं और मेरी मां ने मिलकर कई पुरस्कार भी जीते'।
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आनंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई स्थित इग्मोर के डॉन बॉस्को मैट्रिकुलेशन हाइयर सेकंडरी स्कूल से पूरी की। बाद में चेन्नई के लोयला कॉलेज से कॉमर्स में बैचलर डिग्री ली। आनंद को पढ़ना, तैरना और गाना सुनना बेहद पसंद है। 9 अप्रैल, 2011 को आनंद ने अरूणा आनंद से शादी की।

गैरी कास्पारोप, व्लादीमीर क्रामनिक, मैग्नस कार्ल्सन जैसे खिलाड़ियों से आनंद का मैच बेहद ही रोमांचक और रोचक रहा है। कई बार आनंद उन्हें हराने में कामयाब रहे तो कई बार उन्हें हार का स्वाद चखना पड़ा। आनंद पहले भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्हें 7 नवंबर, 2010 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के लंच पर न्योता मिला था।

पहली बार ग्रैंडमास्टर
विश्वनाथन आनंद में शतरंज की प्रतिभा कूट-कूट कर भरी थी। आनंद ने 6 साल की आयु से शतरंज खेलना शुरू किया। शतरंज की चालों को तेजी से समझने में माहिर आनंद ने 1983 में नेशनल सब-जूनियर चेस चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके बाद वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप और 1987 में ग्रैंडमास्टर खिताब जीतकर अपना लोहा मनवाया।

वर्ल्ड चैंपियन बनने का सफरनामा
--विश्वनाथन आनंद ने 2000 में तेहरान में एलेक्सेई शिरोव को हराकर पहली बार एफआईडीई वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीता।
--2007 में आनंद ने अगला विश्व चैंपियनशिप खिताब रूस के व्लादिमीर क्रैमनिक को पटखनी देकर अपने नाम किया। इस खिताब जीतने के लिए उनका सामना दुनिया के आठ सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से हुआ था।
--2008 में एक बार फिर आनंद का सामना रूसी खिलाड़ी व्लादिमीर क्रैमनिक से हुआ। उस समय आनंद को क्रैमनिक के सामने खिताब का प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था। लेकिन आनंद ने सभी को चौंकाते हुए इस बार भी खिताब अपने नाम किया।
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--आनंद चौथी बार चैंपियन तब बने जब उन्होंने 2010 में बल्गारिया के वेसेलीन टोपालोव को शिकस्त दी।
--2012 में इजरायल के बोरिस गेलफेंड को हराकर आनंद वर्ल्ड चैंपियन बने।

कई और पुरस्कारों से नवाजे गए
--1985 में अर्जुन अवॉर्ड।
--1987 में पद्मश्री पुरस्कार।
--1991-92 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड।
--2000 में पद्म भूषण अवॉर्ड।
--2007 में पद्म विभूषण अवॉर्ड।
--1987 में सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड और नेशनल सिटीजंस अवॉर्ड।
--1998 में आनंद की पुस्तक 'माई बेस्ट गेम्स ऑफ चेस' के लिए ब्रिटिश चेस फेडरेशन का 'बुक ऑफ द ईयर अवार्ड'।
--1997, 1998, 2003, 2004, 2007, 2008 में चेस ऑस्कर अर्वार्ड।
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