भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। 5 जुलाई 1995 को हैदराबाद में जन्मीं सिंधू आज 26 साल की हो गर्ईं। बहुत कम उम्र में सिंधू का शुमार दुनिया की दिग्गज महिला बैडमिटन खिलाड़ियों में किया जाने लगा। वह भारत की महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीता। सिंधू को विश्व पटल पर उस समय पहचान मिली जब साल 2012 में बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन की तरफ से जारी की गई रैंकिंग में उन्होंने 20वां स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उन्होंने 17 साल की उम्र में हासिल की।
सिंधू को खेल विरासत में मिला है। उनके पिता पीवी रमन्ना और मां पी विजया राष्ट्रीय स्तर तक वॉलीबॉल खेल चुके हैं। आइए आज उनके जन्मदिन के मौके पर सिंधू के अब तक के बैडमिंटन करियर पर एक नजर डालते हैं।
मलेशिया ओपन 2013- स्वर्ण पदक
साल 2013 में मलेशिया ओपन में स्वर्ण पदक जीतकर सनसनी फैला दी। इसके बाद वह एक युवा खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बैडमिंटन जगत में बनाने में सफल रहीं।
ग्वांगझू वर्ल्ड चैंपियनशिप 2013- कांस्य पदक
इसके बाद उसी साल यानी 2013 में एक बार फिर सिंधू ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा। चीन के ग्वांगझू में बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन की तरफ से आयोजित की गई विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। इस मुकाबले में उन्होंने ओलंपिक पदक विजेता वान इहान को हराया था। सिंधू विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज 2015- रजत पदक
डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज के समय सिंधू शानदार फॉर्म में थीं और उन्होंने शीर्ष खिलाड़ी वांग इहान को हराकर फाइनल में जगह बनाई। लेकिन इसके बाद वह फाइनल नहीं जीत सकीं और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
रियो ओलंपिक 2016- रजत पदक
भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में नया अध्याय उस समय जुड़ा जब रियो ओलंपिक में अपना दबदबा कायम करते हुए सिंधू ने रजत पदक जीता। उनकी इस असाधारण प्रतिभा के चलते उन्हें नई उचाई मिली। उस समय भारत की तरफ से ओलंपिक में 116 में किया गया ये सबसे अच्छा प्रदर्शन था।
इसके अलावा पीवी सिंधू ने इंडिया ओपन 2017 में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने इंडिया ओपन सुपरसीरीज फाइनल में कैरोलिना मारिन को हराते हुए न सिर्फ ओलंपिक का बदला चुकाया बल्कि खिताब भी अपने नाम किया। इसके बाद 2019 में भी उनका स्वर्णिम सफर जारी रहा और इस साल बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने फाइनल में जापान की खिलाड़ी नाजोमी ओकुहारा को हराकर यह खिताब जीता था।