आज सिंधु का दिन नहीं था। शुरुआत से दबाव में खेलीं। वो अपना नैसर्गिक खेल नहीं खेलीं। वो अपनी पुरानी प्रतिद्वंदी ताई के हिसाब से खेलीं। अपनी जीत के लिए खेलतीं तो शायद परिणाम अलग हो सकता था। फिर भी सिंधु बेहतरीन खिलाड़ी हैं और ओलिंपिक में इस मुकाम तक पहुंचना भी बहुत मुश्किल है। चांदी की चमक को सोने में बदलने का सिंधु का ख्वाब तो अधूरा रह गया पर सिंधु ने अपने खेल से जो चमक बिखेरी है वो कायम रहेगी। ताई ने सिंधु की कमजोरियों को भांपते हुए लगातार आक्रमण किया। ताई के बॉडी स्मैश का सिंधु के पास कोई जवाब नहीं था।
रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता सिंधु ने इस्राइल की केन्सिया पोलिकारपोवा को 21-7, 21-10 से हराकर अपने टोक्यो अभियान की अच्छी शुरुआत की थी। ग्रुप जे के अपने दूसरे मुकाबले में सिंधु ने हांगकांग की च्युंग एनगान को 21-9, 21-16 से शिकस्त दी। उन्होंने दूसरे मैच में अपने प्रतिद्वंदी पर 36 मिनट में जीत दर्ज कर तीसरे दौर में पहुंचीं। तीसरे दौर (प्रीक्वार्टरफाइनल) में इस स्टार खिलाड़ी ने डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ड को हराया। सिंधु ने मिया ब्लिचफेल्ट को सिर्फ 41 मिनट में 21-15, 21-13 से हराकर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया था। सिंधु ने क्वार्टरफाइनल में जापान की अकाने यामागुची को 21-13, 22-20 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था।