टीम स्पर्धा में कुल पांच मैच होते हैं। इनमें तीन एकल और दो युगल मैच होते हैं। अगर कोई टीम लगातार तीन मैच लेती है तो मुकाबला वहीं समाप्त हो जाता है, वरना मुकाबला बेस्ट ऑफ फाइव का हो जाता है। भारतीय टीम शुरुआती दो मैच जीतकर एक वक्त 2-0 से आगे थी। एकल में लक्ष्य सेन और युगल में सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने भारत को बढ़त दिलाई।
लक्ष्य और सात्विक-चिराग
हालांकि, इसके बाद चीन ने वापसी की और अगले तीनों मैच जीतकर स्वर्ण पर कब्जा जमाया। तीसरे मैच में एकल में किदांबी श्रीकांत, चौथे मैच में युगल में ध्रुव कपिला-साई प्रतीक की जोड़ी और पांचवें एकल मैच में मिथुन मंजूनाथ को हार का सामना करना पड़ा।
प्रणय का चोटिल होना पड़ा भारी
श्रीकांत अगर मैच जीत लेते तो भारत की झोली में स्वर्ण आता। वहीं, मौजूदा समय में भारत के नंबर वन बैडमिंटन खिलाड़ी एचएस प्रणय पीठ में चोट की वजह से फाइनल नहीं खेले। उनका नहीं खेलना टीम इंडिया को भारी पड़ा। उनकी जगह मिथुन को खेलने उतरना पड़ा।
एचएस प्रणय
भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने एशियाई खेलों में आज तक कभी स्वर्ण नहीं जीता है। इस स्पर्धा में भारत को पिछला पदक 1986 में आया था। पुरुष टीम ने कांस्य से ज्यादा इस स्पर्धा में कोई पदक नहीं जीता है। 1974 और 1982 में भी भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम ने कांस्य ही जीता था। पुरुष बैडमिंटन टीम इवेंट एशियाई खेलों में 1962 से खेला जा रहा है। 61 वर्षों में पहली बार भारत ने पुरुष बैडमिंटन टीम इवेंट में रजत पदक जीता है। वहीं, 37 साल बाद इस स्पर्धा में भारत को कोई पदक मिला है।
पहले मैच में लक्ष्य सेन और शी यूची आमने-सामने आए। इस मैच को लक्ष्य ने 22-20, 14-21, 21-17 से अपने नाम किया। लक्ष्य और शी यूची के बीच पहले गेम में कड़ी टक्कर हुई। लक्ष्य ने पहले गेम को 22-20 से अपने नाम किया था। इसके बाद शी यूची ने वापसी की और 21-14 से अपने नाम किया। तीसरे गेम में लक्ष्य एक वक्त 13-9 से पिछड़ रहे थे। इसके बाद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और 16-16 से बराबर कर दिया। इसके बाद इस गेम को लक्ष्य ने 21-17 से अपने नाम किया। इस तरह भारत ने चीन पर 1-0 की बढ़त बनाई।
लक्ष्य सेन
दूसरे मैच में पुरुष युगल में चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी का सामना योंग डुओ लियांग और वेंग चेंग से हुआ। चिराग-सात्विक ने पहला गेम आसानी से 21-15 से जीत लिया। इस गेम में भारतीय जोड़ी ने दबदबा बनाए रखा और चीनी जोड़ी को अंक नहीं अर्जित करने दिए। इसके बाद दूसरे गेम को भी चिराग-सात्विक ने 21-18 से जीता। इस तरह दोनों ने भारत को चीन पर 2-0 की बढ़त दिलाई।
सात्विक और चिराग
तीसरे मैच में एकल में भारत के किदांबी श्रीकांत का सामना शिफेंग ली से हुआ। शिफेंग ने पहले गेम में श्रीकांत को 24-22 से हरा दिया। इसके बाद दूसरे गेम में शिफेंग ने श्रीकांत को 21-9 से हरा दिया। चीन ने वापसी करते हुए बढ़त को 1-2 कर दिया है। चीन के लियु युचेन और ओउ जुआनयी ने ध्रुव कपिल और साई प्रतीक की जोड़ी को 21-6, 21-15 से हरा दिया। पांचवें मैच में चीन के वेंग होंगयांग ने मिथुन मंजूनाथ को 21-12, 21-4 से हरा दिया। इस तरह भारत को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
किदांबी श्रीकांत और लक्ष्य सेन और चिराग-सात्विक
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भारतीय पुरुष टीम ने शनिवार को कड़े मुकाबले में दक्षिण कोरिया को 3-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। एचएस प्रणय ने जियोन ह्योक जिन को 18-21, 21-16, 21-19 से हराकर 1-0 की बढ़त दिलाई थी। सात्विक साईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी को सियोंग-मिन की जोड़ी ने 13-21, 24-26 से हराया। लक्ष्य ने इसके बाद लक्ष्य ने ली यंगयू को 21-7, 21-9 से हराया। अर्जुन-ध्रुव कपिला को किम-सुंगसियोंग 16-21, 11-21 से हार मिली, लेकिन निर्णायक मुकाबले में किदांबी श्रीकांत ने चो जियोनयप को 12-21, 21-16, 21-14 से परास्त कर भारत को फाइनल में पहुंचाया था।