रक्षा मंत्री एके एंटनी की घोषणा के पौने दो साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स विजेताओं को रक्षा मंत्रालय की ओर से कैश अवॉर्ड तो दे दिया गया। लेकिन एशियाई खेलों में देश का झंडा बुलंद करने वाले सेना के पदक विजेताओं को दूध में मक्खी की तरह से निकालकर फेंक दिया गया है।
सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड (एसएससीबी) मंत्रालय से तीन बार गुहार लगा चुका है कि कॉमनवेल्थ गेम्स की तर्ज पर 2010 के गुआंग झू एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले सेना के खिलाड़ियों को भी कैश अवॉर्ड दिया जाए। लेकिन मंत्रालय ने अब तक फैसला नहीं लिया है।
एशियाई खेलों में सेना के खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण समेत 10 पदक जीते थे। स्वर्ण पदक जीतने वाली कबड्डी टीम में भी दो खिलाड़ी जसमेर सिंह व समरजीत सिंह सेना से संबंधित हैं। गुआंग झू में रोइंग में पहली बार देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले बजरंग लाल ठाकर इस उपेक्षा से बुरी तरह आहत हैं।
बजरंग लाल कहते हैं कि जब कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं को कैश अवॉर्ड दे दिया गया है तो फिर उन लोगों ने क्या खता की है। उन्हें भी कैश अवॉर्ड दिया जाना चाहिए। एशियाई खेलों का स्तर कॉमनवेल्थ गेम्स से कहीं से कम नहीं है। सिर्फ बजरंग ही नहीं तीन रजत पदक जीतने वाले 16 खिलाड़ी भी सेना के हैं। रजत जीतने वाली सेलिंग टीम में भी सेना के खिलाड़ी हैं।
हालांकि शूटर विजय कुमार लंदन ओलंपिक में पदक जीतने के बाद एशियाई खेलों का कैश अवॉर्ड नहीं दिए जाने की आवाज उठा चुके हैं। बावजूद इसके रक्षा मंत्रालय ने कुछ नहीं किया। विजय ने गुआंग झू में दो कांस्य पदक जीते थे। नामी मुक्केबाज सुरंजय सिंह ने भी यहां कांस्य पदक जीता था। कुछ दिन पूर्व एसएससीबी के सचिव पद से मुक्त होने वाले एयर कोमोडोर एम बालादित्या का कहना है कि रक्षा मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। निर्णय उन्हें ही लेना है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के ठीक बाद रक्षा मंत्री ने घोषणा की थी कि इन खेलों में स्वर्ण जीतने वाले को 12 रजत जीतने वाले को साढ़े सात व कांस्य पदक विजेता को पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। अधिकारियों ने यह भी साफ किया था कि यही राशि एशियाई खेलों के पदक विजेता को भी दी जाएगी।