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एशियन गेम्स 2026: सोनम ने माता-पिता को समर्पित किया रजत पदक, विदर्सा बोलीं- आठ साल की मेहनत का सपना हुआ पूरा

Sun, 20 Sep 2026 04:48 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नगोया।

सार

एशियन गेम्स 2026 में महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम का रजत भारत के लिए खास रहा। सोनम मस्कर ने अपना पदक माता-पिता को समर्पित किया और कहा कि उनके बिना वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। वहीं विदर्सा के. विनोद ने बताया कि एशियन गेम्स में खेलने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने आठ साल तक मेहनत की है। दोनों ने अपनी सफलता में परिवार, कोच और सहयोगी संस्थाओं के योगदान को अहम बताया।
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सोनम मस्कर और विदर्सा के विनोद - फोटो : IANS
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विस्तार
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एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला निशानेबाजों ने 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का पदक खाता खोला। इस उपलब्धि के बाद सोनम मस्कर ने अपना पदक माता-पिता को समर्पित किया, जबकि विदर्सा के. विनोद ने कहा कि एशियन गेम्स में हिस्सा लेना उनका सपना था, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने आठ साल तक कड़ी मेहनत की।

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सोनम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन और विदर्सा कोचलुमकल की तिकड़ी ने महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में 1897 अंक हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया।

सोनम बोलीं- यह पदक मां-पापा को समर्पित
रजत पदक जीतने के बाद सोनम मस्कर ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा कि उनके बिना वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। सोनम ने कहा कि भारत का इस स्तर पर प्रतिनिधित्व करना शानदार अनुभव है। मुझे रजत पदक जीतने पर गर्व है। मैं यह पदक अपनी मां और पिता को समर्पित करना चाहूंगी। उनके बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।

उन्होंने अपने सफर में मिले सहयोग के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय रेलवे और सेना का भी आभार जताया। सोनम ने कहा कि उन्हें सरकार के साथ-साथ अपने प्रायोजकों से भी काफी मदद मिली।

विदर्सा, इलावेनिल और सोनम - फोटो : Twitter
विदर्सा बोलीं- एशियन गेम्स का अनुभव शब्दों में बयां नहीं कर सकती
टीम रजत में अहम योगदान देने वाली विदर्सा के. विनोद ने एशियन गेम्स के अनुभव को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था और इसके लिए उन्होंने आठ साल तक मेहनत की है।

विदर्सा ने कहा कि इस अनुभव और रोमांच को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। एशियन गेम्स में हिस्सा लेना मेरा सपना था, जो अब सच हो रहा है। मैंने यहां तक पहुंचने के लिए आठ साल तक कड़ी मेहनत की है।  विदर्सा ने बताया कि वह केरल की रहने वाली हैं और दिल्ली में प्रशिक्षण लेती हैं। शूटिंग के शुरुआती दिनों में उन्हें सही मार्गदर्शन की कमी महसूस होती थी, लेकिन बाद में उनके पति ने उनके प्रशिक्षण से जुड़े फैसलों में मदद की।

दबाव से निपटना भी सीखा
एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर दबाव के बारे में बात करते हुए विदर्सा ने कहा कि शुरुआत में उन्हें दबाव महसूस होता था, लेकिन अब वह हर प्रतियोगिता को एक जैसा मानकर अपनी तैयारी पर ध्यान देती हैं। उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा फोकस शूटिंग पर है। उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया है, लेकिन प्रतियोगिताओं और लगातार तैयारी के कारण पोस्ट-ग्रेजुएशन नहीं कर पाईं।
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बाएं से- विदर्सा, सोनम और इलावेनिल - फोटो : NRAI
पति और कोच का भी मिला साथ
विदर्सा ने बताया कि उनके पति उन्हें सपोर्ट करने के लिए जापान में उनके साथ हैं, जबकि उनका बाकी परिवार भारत में है और वहीं से उन्हें आशीर्वाद दे रहा है। उनके कोच मनोज कुमार भी इस दौरान उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि विश्व कप, एशियन चैंपियनशिप और घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार हिस्सा लेने के कारण प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के बीच काफी समय देना पड़ता है।

सोनम-विदर्सा के लिए खास रहा दिन
सोनम ने टीम स्पर्धा में रजत जीतने के साथ व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा के फाइनल में भी जगह बनाई, जहां वह छठे स्थान पर रहीं। वहीं एलावेनिल वलारिवन ने टीम रजत के बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में भी शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक जीता। जापान की हिनाता ताइची ने 253.0 के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि एलावेनिल ने 252.4 अंक के साथ रजत हासिल किया। दक्षिण कोरिया की बान ह्यो-जिन ने 230.4 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
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