क्रिकेट के हल्ले के बीच विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद और उन्हें चुनौती देने वाले नॉर्वे के मैगनस कार्लसन के बीच उस दिलचस्प मुकाबले की घड़ी आखिरकार आ गई है, जिसका इंतजार शिद्दत से किया जा रहा था।
शतरंज की बिसात बिछ चुकी है और मोहरों के बूते आसमान पर राज करने वाले दुनिया के दो दिग्गज शनिवार से मैदान-ए-जंग में उतरेंगे और दांव पर लगा होगा ताज।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने विश्वनाथन आनंद और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन के बीच खेले जाने वाली फिडे (FIDE) विश्व शतरंज चैंपियनशिप का गुरुवार को आगाज हुआ और मुकाबला शनिवार से होगा।
पांच बार के विश्व चैंपियन ग्रैंडमास्टर आनंद अपना खिताब बचाने की मुहिम में जुटेंगे। दोनों खिलाड़ियों के बीच विश्व खिताब के लिए यह मुकाबला करीब एक महीना चलेगा।
जयललिता ने निकाला ड्रॉ
स्थानीय जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित रंगारंग उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने शीशे के एक जार से आनंद की तस्वीर निकाली और दूसरे जार से काले मोहरे निकाले। आनंद पहली बाजी काले मोहरों से खेलेंगे।
इस अवसर पर जयललिता ने कहा कि चेन्नई में इस टूर्नामेंट का आयोजन शतरंज के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे देश में शतरंज को बढ़ावा मिलेगा।
शुरुआत में दिक्कतों में रहे आनंद
आनंद उसके बाद शतरंज की दुनिया में परेशानियां झेलते रहे, जो पूरी तरह रूस समर्थक थी और उसमें भेदभाव भी था।
नियम बदले गए, उनका विश्लेषण इस तरह किया गया कि वह रूसी खिलाड़ियों के लिए ही मददगार रहा। आनंद खामोश रहे। उन्होंने केवल बोर्ड की तरफ ध्यान दिया और शतरंज खेलते रहे।
आनंद 1991 में अनातोली कार्पोव से हारे। इसके बाद 1995 में गैरी कास्परोव से हारे और 1998 में एक बार फिर कार्पोव से हार गए। ( उक्त फोटो में आनंद की तैयारी कराने वाली टीम है।)
लेकिन इसके बाद आनंद की हार का सिलसिला टूट गया, वह चैंपियन बने। वह 2000 में पहली बार विश्व चैंपियन बने। उसके बाद उन्होंने 2007, 2008-2010 और 2012 में भी चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।