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लाभ पाने के लिए जोखिम उठाना जरूरी

Wed, 03 Apr 2013 11:11 AM IST
ज्योतिर्मय
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आमतौर पर समझा जाता है कि जोखिम उठाने से बचना चाहिए लेकिन अध्यात्म और मानव स्वभाव के बारे में नए अनुसंधान इस समझ को गलत बताते हैं।
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इन खोजों और अध्ययनों के मुताबिक जिन लोगों में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति होती है वे बहुत तेज जिंदगी जीते हैं। हांलाकि जो जोखिम वे उठाते हैं वे नुकसानदेह साबित हो सकते हैं लेकिन उनके पास अंत में पुरस्कार हासिल करने की संभावना भी रहती है।

योग फाउंडेशन बंगलुरू और ऋषिकेश में योगनिकेतन की प्रयोगशाला में हुए प्रयोग परीक्षण के दौरान पड़ताल की गई की जोखिम उठाने के मामले में अलग-अलग लोगों का कैसा व्यवहार होता है।
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इन अनुसंधानों में यह पता चला की वे जीन्स जो दिमाग के क्रियाकलापों की भिन्नता का कोड बनाते हैं वे अक्सर उतने ही भिन्न होते हैं जितना की हमारा व्यवहार भिन्न होता है।

अध्ययन में खासकर वे जीन्स शामिल किए गए थे जो डोपामीन सिस्टम में शामिल रहते हैं। डोपामीन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो हमारे दिमाग में खुशी और पुरस्कार को स्थापित करता है।

मानव विकास का आधुनिक मॉडल इस धारणा पर जोर देता है कि एक समूह में कुछ ऐसे लोग होने जरूरी हैं जो जोखिम उठाने को तैयार हों जैसे कि यह देखने के लिए की नदी के उस पार क्या है?
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हालांकि यह खतरे से भरा है लेकिन इस खतरे के पुरस्कार खूब सारे हो सकते हैं जैसे कि उपजाऊ जमीन, भोजन, संसाधन।

भले ही जोखिम उठाने वालों को नुकसान का खतरा रहता है लेकिन कामयाब होने पर वे समाज की बहुत महत्वपूर्ण सेवा करते हैं।

हम में से अधिकतर लोग अपने दिमाग में जोखिम की लागत व लाभ की गणना कर लेते हैं लेकिन हमारा जीव विज्ञान हमें एक विशेष प्रवृत्ति व प्रेरणा की ओर आगे बढ़ाता है।

यह याद रखना अहम है की मानव बहुत ही दिमागदार प्राणी के रूप में विकसित हुआ है जो फैसले ले सकता है इसलिए हम अपने जीव विज्ञान के कैदी नहीं हैं।

हमारे पास फैसले लेने की काबिलियत हमेशा होती है जिनके जरिए हम अपनी इच्छाओं को एक या दूसरे तरीके से व्यक्त करते हैं।
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