छाया पुरुष या हमजाद सिद्धि या अपने ही सूक्ष्म शरीर से मुलाकात की बातें किस्से कहानियों जैसी लगती तो है लेकिन उनमें अब सचाई की संभावना भी देखने लगी हैं।
नीदरलैंड के जीव विज्ञानी डा. नेल्ली वाटसन ने एक किताब लिखी है 'एंटी मैटर एंड साउल' इस किताब में इन्होंने यह बताया है कि स्वप्न शरीर की रचना सपनों और कल्पनाओं से ही नहीं होती।
रासायनिक क्रिया के जरिए भी स्वप्न शरीर की रचना की जा सकती है। इस बारे में उन्होंने परिकल्पना दी कि प्रयोगशाला में जब टेस्टट्यूब बेबी तैयार किया जा सकता है तो छायापुरुष की रचना भी की जा सकती है।
ऐसी घटनाओं का तो अंबार है जिनमें छाया पुरुष से आमना-सामना हुआ। उनकी वास्तविकता पर संदेह नहीं किया जा सकता क्योंकि वे बाकायदा जांची परखी या ऐसे लेखकों द्वारा लिखी गई है जिनकी प्रामाणिकता असंदिग्ध है।
सत्रहवीं शताब्दी के नामी लेखक और दार्शनिक जॉन ओब्रे ने एक किताब लिखी है 'ब्रीफ लाइव्स'। इस में ऐसे अनेक प्रंसंगों की चर्चा की गयी है, जिसमें व्यक्ति की अपनी ही अनुकृति से आमना-सामना हुआ।
एक घटना तत्कालीन प्रख्यात ज्योतिषी सर रिचर्ड नेपियर से भी जुड़ी है। इस घटना में नेपियर ने अपने ऐसे शरीर की रचना अनजाने ही कर ली थी जो उनकी मृत्यु के बाद भी काम करता रहा था।
जॉन बास्को ने अपनी कृति 'स्ट्रेंज एनकांउण्टर्स' में ऐसी कई घटनाओं का वर्णन किया है, जब व्यक्ति को अपने ही ब्लू प्रिन्ट से सामना हो गया हो।
शुरु में लोगों को हैरानी हुई। कुछ ने उन घटनाओं को काला जादू समझा तो कुछ ने यह माना कि कुदरत उन्हें कुछ रहस्य समझा रही है। पढऩे सुनने में ऐसी घटनाएं अटपटी जान पड़ती हैं और नजरों का धोखा भी लगती है।
लेकिन साधना विज्ञान के छाया-पुरुष वाली मान्यता उक्त भ्रान्ति को निर्मूल साबित कर देती है, जिसमें कहा गया है कि यदि व्यक्ति थोड़ा सा प्रयास करे, तो नियमित अभ्यास द्वारा वह अपना न सिर्फ छाया-पुरुष तैयार कर सकता है, अपितु उससे अनेक ऐसे भी कार्य करवा सकता है, जो स्वयं उसके लिए संभव नहीं।