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आखिर कैसे समस्या का हल अचानक दिमाग में आ जाता है?

Wed, 02 Oct 2013 07:51 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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बहुत बार ऐसा होता है कि लाख सिर पटक लें किसी समस्या का हल ही नहीं निकलता। बुद्धि काम नहीं करती और सिर धुन लेने का मन करता है। अक्सर ऐसे समय में अचानक कोई खयाल आता है, जिसका उस समस्या से कोई वास्ता ही नहीं रहता। उस ख्याल के बाद अचानक अपनी समस्या का ध्यान आता है और चमत्कारी ढंग से महसूस होता है कि समस्या का समाधान मिल गया।
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आकाश में बिजली की तरह कौंधने वाला यह समाधान बाहर से या कहीं किसी और लोक से नहीं आता। करीब सात सौ वैज्ञानिकों, कलाकारों और लेखकों का अध्ययन के बाद न्यूयार्क की साइकोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता माइकल मिशेलको ने कहा है कि समाधान या नए विचार व्यक्ति के अवचेतन में छुपे हैं।

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व्यक्ति जब किसी समस्या या गुत्थी से जूझ रहा होता है तो गहरे तनाव के बाद एक स्थिति ऐसी आती है कि उसका अवचेतन सक्रिय हो जाता है। इसे यूं भी कह सकते हैं कि चेतन मन मूर्छाग्रस्त हो जाता है और अवचेतन की तरंगे सतह पर आ जाती है। उनके सतह पर आते ही समस्या फुर से उड़ जाती है और समाधान सामने होता है।
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दुनियादारी के झमेलों से दूर रहने वाले या उनकी उपेक्षा करने वाले व्यक्तियों की बुद्धि इतनी निर्मल होती है कि वह अनायास ही अवचेतन के संपर्क में आ जाती है। संपर्क की प्रक्रिया सेकंड के भी हजारवें हिस्से में घट जाती है।

फिर जो समाधान आते हैं, उनके बारे में लगता है कि जैसे चमत्कार हो गया है। अध्ययन के अनुसार समाधान तभी आते हैं जब चेतन मन सो जाता है या निष्क्रिय हो जाता है। इस प्रक्रिया का तार योग से जोड़ते हुए मा कीर्ति ओम (जीन मिशेल) का कहना है कि ध्यान आपको उस स्थिति में ले जाता है, जिसमें व्यक्ति चेतन की परतो को पारकर सूझ और समाधान बताने वाली सूक्ष्म बुद्धि तक पहुंच जाता है।
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