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अरे वाह! बिना दवाई और इंजेक्शन रोगों से छुटकारा मिलेगा ऐसे

Tue, 08 Apr 2014 09:43 AM IST
ज्योतिर्मय/अमर उजाला, दिल्ली
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यज्ञ अग्निहोत्र एक तरह का समूह चिकित्सा भी है, इससे किसी एक ही तरह की बीमारी से पीड़ित कई रोगियों को एक साथ ठीक किया जा सकता है। यह एम्सटर्डम स्थित महर्षि आयुर्वेद रिसर्च केंद्र के प्रयोगों से साबित हुआ है। प्रयोग में बताया गया कि यज्ञ चिकित्सा सुनिश्चित और तुरंत लाभ पहुंचाने वाली आसान उपचार पद्धति है।
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केंद्र में अस्थमा और टीबी से पीड़ित 36 रोगियों को दो अलग अलग समूहों में ऱखा गया। उन्हें शार्गंधर संहिता में बताई औषधियों का हवन कर उसके धुएं का सेवन कराया गया।

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इन औषधियों का धुंआ औषध तत्वों को सांस के साथ घोल दिया गय़ा तो रोगी तीन से सात सप्ताह में ठीक होने लगे। प्रयोग के संयोजक वैद्य हरिदत्त (एल्फ्रेड गोए) के उपचार ने किस तरह काम किया इसका ब्यौरा भी दिया।
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उन्होंने कहा कि औषधिय़ों का प्रभाव रक्तवाही संस्थान के रास्ते ही उनके वाष्पीभूत होने के कारण, जहां उसकी आवश्यकता थी वहां तेजी से पहुंच सका। सामान्य स्थिति में यह प्रवाह मुंह से या रक्त में प्रवेश (इंजेक्शन) के जरिए दी गई। यह औषधि से आढ गुना तेजी सा पहुंचा।

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वैद्य हरिदत्त के अनुसार हाइपॉक्सिया (कॉमा) के या वेण्टीलेशन पर रखे गए रोगी को सांस लेने में कठिनाई होने पर नाक से ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। किन्तु इस ऑक्सीजन को शुद्ध रूप में नहीं दिया जाता, इसमें कार्बन डाइऑक्साइड का करीब पांच प्रतिशत अंश भी रहता है, ताकि मस्तिष्क के केन्द्रों को उत्तेजित कर श्वसन प्रक्रिया नियमित बनायी जा सके।

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अग्निहोत्र में उत्पन्न वायु ऊर्जा में भी यही अनुपात गैसों के सम्मिश्रण का रहता है। विशिष्ट समिधाओं को जलाने और खास तरह की औषधियों का हवन करने से नाक द्वारा आक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड देने का झंझट भरा काम आसानी से हो जाता है।

शारीरिक रोगों एवं मनोविकारों से पैदा हुई तकलीफों से छुटकारे के लिए अग्निहोत्र से बढ़कर अन्य कोई उपयुक्त उपचार है ही नहीं, यह तय सा होता जा रहा है।

इस दिशा में जिस तरह शोध और प्रयोग चल रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि निकट भविष्य में यज्ञ चिकित्सा की खोई हुई कड़ियां तलाश की जा सकेगी और यह पद्धति एक नए रुप में उपलब्धि होगी।
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