स्वास्थ्य या रोग मुक्ति का रहस्य उपचार में नहीं विश्वास में है। आप विश्वास करें कि आप स्वस्थ हैं और यकीन मानें आपके रोग ठीक होने लगेंगे।
ईसा से भी पहले से चले आ रहे क्वेकर संप्रदाय के लोग आज भी औषधियों से परहेज करते है और कभी-कभार ही बीमार पड़ते है। अब चिकित्सा विज्ञान भी इस नतीजे तक पहुंचने लगा है कि स्वस्थ रहने के लिए विश्वास जरूरी है।
बंगलूर की रिसर्च इन्स्टीट्यूट फार वाइटल एनर्जी (प्राणशक्ति शोध संस्थान) के डाक्टर बेन्जामिन मेसन का कहा है अपने चारों और सकारात्मक ऊर्जा हवा और आकाश की तरह बिखरी पड़ी है। उससे संपर्क साध लिया जाए तो शरीर में अपरिमित आरोग्यकारी क्षमता अर्जित की जा सकती है।
अब तक तीन सौ से ज्यादा रोगियों पर परीक्षण कर चुके और ज्यादातर मामलों में सफल रहे डा. मेसन का कहना है कि यह विज्ञान आज का नहीं है बल्कि हजारों साल पुराना है।
सभी धर्म समाज और सभ्यताएँ ऊर्जा चिकित्सा की जन्मस्थली होने का दावा करते हैं। जिस प्रकार यह दुनिया और धरती आकाश किसी एक देश, जाति, धर्म के नहीं है, उसी तरह ऊर्जा चिकित्सा भी किसी एक की धरोहर नहीं है।
ऊर्जा चिकित्सा की जानकारी सर्वप्रथम एशियाई क्षेत्र को हुई, ऐसा माना जाता है। वेदों में, पाणिनी सूत्र में ऊर्जा चिकित्सा का उल्लेख मिलता है। वहां इसे "प्राण शक्ति" का नाम दिया गया है। यह वह शक्ति है, जो जीव मात्र में सतत कार्यरत है और जिसके रूप बदल लेने पर शरीर का कार्य करना बन्द हो जाता है।
लिखित रूप से इसका उल्लेख महात्मा बुद्ध के काल में रचित ग्रन्थों मे मिलता है। जिनके अनुसार महात्मा बुद्ध और उनके कुछ खास शिष्य अपने संकल्प शक्ति और स्पर्श से बीमारियों परेशानियों का निदान करते थे। ईसा मसीह और दूसरे कई संतों द्वारा भी इस शक्ति के उपयोग के उल्लेख मिलते है।
किसी ज़माने में गुप्त और आध्यात्मिक मानी जा रही यह विद्या अब आम लोगों तक पहुँच रही है। बुद्ध के समय में इस विद्या को जानने के लिये साधक को अपने तन-मन से सम्पूर्ण तपस्या करनी होती थी, तत्पश्चात महात्मा बुद्ध साधक को (जब वह साधक इस विद्या को ग्रहण करने योग्य लगता तो) उसको सुसंगत किया करते थे।
अगर कहीं से भी महात्मा बुद्ध को ये लगता कि अभी "इस साधक" में इस दिव्य विद्या को ग्रहण करने कि योग्यता नहीं आ सकी है तो उस साधक को पुनः साधना करने की आज्ञा दी जाती थी।
इस गुरू शिष्य परंपरा का निर्वाह अपने काल के प्रत्येक गुरूजनों ने किया, इसका कभी उल्लंघन हुआ हो, ऐसा विदित नहीं है। अब इसे सार्वजनीन बनाने के उपाय किए जा रहे है।