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जब मरते समय उसने लिया बेटे का नाम और हो गया चमत्कार

Tue, 11 Feb 2014 01:12 PM IST
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली।
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मौत की घड़ी सामने आ गयी थी। खाट पर लेटा हुआ अजामिल अपने बीते दिनों को याद कर रहा था। एक सुंदर स्त्री के रुप पर मोहित होकर इसने अपनी पतिव्रता पत्नी को छोड़ दिया।
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स्त्री के रुप जाल में उलझकर सारे अनैतिक काम किया ताकि वह प्रसन्न रहे। माता-पिता के समझाने पर उनका भी अपमान किया। अजामिल को अपने युवावस्था में किए सारे पाप याद रहे थे।

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अजामिल की उल्टी सांसें चलने लगी। सभी रिश्तेदार बेटे उसके सामने आकर बैठे थे। अजामिल ने देखा कि उसका छोटा बेटा नारायण पास में नहीं है। उसे अपने छोटे बेटे को पुकारा नारायण नारायण।
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इतने में अजामिल के प्राण निकल गए। यमदूत आजामिल की आत्मा को बंदी बनाकर अपने साथ ले जाने लगे। शंख, चक्र, गदा धारण किए नारायण के समान दिखने वाले नारायण के सेवक वहां पहुंच गए।

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भगवान नारायण के सेवकों ने यमदूतों के बंधन से अजामिल को मुक्त करवाया। विष्णु के दूतों ने यमदूतों से कहा कि अजामिल ने मरते समय अपने पुत्र नारायण को पुकारा है। इसलिए अनजाने में ही इसने भगवान नरायण का नाम लिया है।

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इससे अजामिल जीवन भर किए हुए पापों से मुक्त हो गया है और विष्णु लोक में स्थान पाने का अधिकारी बन गया है। शास्त्रों में कहा भी गया है कि जो व्यक्ति मृत्यु के समय भगवान का नाम लेता है उसे यमदूतों का भय नहीं रहता है। इसलिए लोग अपनी संतान का नाम किसी देवी देवता के नाम पर रखते हैं।
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गीता प्रेस से प्रकाशित कल्याण पत्रिका में अजामिल की कथा का वर्णन किया गया है।
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