फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tulsidas Jayanti 2022: जीवन में सफलता की राह दिखाते हैं गोस्वामी तुलसीदास के ये दोहे

Thu, 04 Aug 2022 12:27 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली

सार

Tulsidas Jayanti 2022: तुलसीदास जी ने अपने जीवनकाल में कई रचनाएं की हैं। उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं। 
विज्ञापन
जीवन में सफलता की राह दिखाते हैं गोस्वामी तुलसीदास के ये दोहे - फोटो : Facebook
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Tulsidas ke Dohe:  प्रत्येक वर्ष सावन माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को तुलसीदास जयंती मनाई जाती है। इस साल तुलसीदास जयंती 04 अगस्त 2022, दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे। रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने ही की थी। तुलसीदास की इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया। रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का काव्य रूप में वर्णन किया है। कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के साक्षात दर्शन हुए थे। तुलसीदास जी ने कवितावली, दोहावली, हनुमान बाहुक, पार्वती मंगल, रामलला नहछू आदि कई रचनाएं कीं। उनके दोहे भी जन-जन की जुबां पर आज भी हैं। उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छे संदेश दिए हैं। उनके दोहों से अच्छी सीख मिलती हैं। यहां तुलसीदास के कुछ प्रेरणादायक दोहे और उनके अर्थ दिए जा रहे हैं- 

विज्ञापन


Koo App

"तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।।" 16वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक, ’श्रीरामचरित मानस’ के साथ-साथ हनुमान चालीसा, जानकी मंगल एवं अन्य कई ग्रंथों के अमर रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्म जयंती पर कोटिशः नमन।

View attached media content

- Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 4 Aug 2022

तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक ।
साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक ।


अर्थ-  गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, विपत्ति के समय में आपको घबराकर हार नहीं माननी चाहिए। ऐसी स्थिति में आपको अपने अच्छे कर्म, सही विवेक और बुद्धि से काम लेना चाहिए। मुश्किल समय में साहस और अच्छे कर्म ही आपका साथ देते हैं। 

राम नाम  मनिदीप धरु जीह देहरीं द्वार।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर। 

अर्थ-
तुलसीदास जी कहते है अगर आप अपने चारों तरफ खुशहाली चाहते हैं तो अपने वाणी पर काबू रखें। गलत शब्द बोलने की जगह राम नाम जपते रहिए इससे आप भी खुश रहेंगे और आपके घरवाले भी खुश रहेंगे।

नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु। 
जो सिमरत भयो भाँग ते तुलसी तुलसीदास। 


अर्थ- राम का नाम लेने से आपका मन साफ रहता है। किसी भी काम को करने से पहले राम का नाम लीजिए। तुलसीदास जी भी राम का नाम लेते-लेते अपने आप को तुलसी के पौधे जैसा पवित्र मानने लगे थे।

विज्ञापन

तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।
सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि। 

अर्थ-
तुलसी दास जी कहते हैं सुंदर रूप देखकर न सिर्फ मूर्ख बल्कि चतुर इंसान भी धोखा खा जाते हैं। जैसे मोर दिखने में बहुत सुंदर लगते हैं लेकिन उनका भोजन सांप है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें