फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुफ्त में जमीन पाने के लिए क्या आप भी ऐसा कर सकते हैं

Thu, 09 Jun 2016 11:00 AM IST
टाल्सटाय की कहानी
विज्ञापन
पॉजिटिव लाइफ
विज्ञापन
एक आदमी के घर किसी दिन एक संन्यासी मेहमान आया। रात के समय बातों ही बातों में उन्होंने कहा, साइबेरिया में जमीन इतनी सस्ती है कि मुफ्त ही मिलती है। वहां हजारों एकड़ जमीन मिल सकती है करीब-करीब मुफ्त में। उस आदमी का लोभ जगा। उसने दूसरे दिन ही साइबेरिया की राह पकड़ी और जब पहुंचा तो उसने पूछा कि मैं जमीन खरीदना चाहता हूं। गांव वालों ने कहा कि तुम जितना पैसा लाए हो, रख दो। फिर जमीन खरीदने का एक ही उपाय है कि कल सुबह सूरज उगने से पहले तुम निकल पड़ना और सांझ सूरज के अस्त होने तक जितनी जमीन तुम घेर सको घेर लेना।
विज्ञापन


 रात-भर तो सो न सका वह आदमी। योजनाएं बनाता रहा कि कितनी जमीन घेर लूँ। सुबह ही भागा। उसने साथ अपनी रोटी पानी का भी इंतजाम कर लिया था। रास्ते में भूख लगे, प्यास लगे तो सोचा था कि दौड़ते दौड़ते खा-पी लूंगा।

सोचा था कि ठीक बारह बजे लौट पड़ूंगा, ताकि सूरज डूबते-डूबते पहुंच जाऊं। दोपहर मीलों का सफर कर लिया है। उसने सोचा कि दोपहर हो गई लौटना चाहिए; लेकिन सामने और उपजाऊ जमीन, और उपजाऊ जमीन, थोड़ी सी और घेर लूं। जरा तेजी से दौड़ना पड़ेगा लौटते समय उसने खाना भी न खाया, पानी भी नहीं पीया, क्योंकि रुकना पड़ेगा। रास्ते में उसने खाना भी फेंक दिया और पानी भी फेंक दिया, क्योंकि उनका वजन भी ढोना पड़ा रहा है। फिर उसने कोट भी उतार दिया, फिर टोपी उतार दी। जितना निर्भार हो सकता था हो गया। दोपहर बीत गई पर पर लौटने का मन नही हुआ। तीसरा पहर हो गया। लौटना शुरु किया, अब घबड़ाया। सारी ताकत लगाई; लेकिन ताकत तो चुकने के करीब आ गई थी। सारी ताकत लगा दी। विक्षिप्त हो कर दौड़ा। सब दांव पर लगा दिया।
विज्ञापन


और सूरज डूबने लगा। करीब पहुंचने लगा है, लोग दिखाई पड़ने लगे। गांव के लोग खड़े हैं औरआवाज दे रहे हैं कि आ जाओ, आ जाओ! उत्साह पदे रहे हैं, भागे आओ! अजीब सीधे-सादे लोग हैं- सोचने लगा मन में; इनको तो सोचना चाहिए कि मैं मर ही जाऊँ, तो इनको धन भी मिल जाए और जमीन भी न जाए।

उसने आखिरी दम लगा दिया- भागा, भागा। सूरज डूबने लगा; इधर सूरज डूब रहा है, उधर भाग रहा है। सूरज डूबते-डूबते वह आदमी गिर पड़ा। अभी सूरज की आखिरी कोर क्षितिज पर रह गई थी- घिसटने लगा। और सूरज डूबा, यहाँ वह आदमी भी मर गया। वहां मौजूद लोग हंसे और आपस में बातें करने लगे, अब तक ऐसा एक भी आदमी नहीं आया, जो घेरकर जमीन का मालिक बन पाया हो।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें