फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जरूरी है अध्यात्म के साथ भौतिकताः आचार्य श्री राम शर्मा

Thu, 08 Nov 2012 12:03 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
विज्ञापन
विज्ञापन
भौतिकता और आध्यात्मिकता परस्पर एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। एक के बिना दूसरी अधूरी है। जंगल में गुफा में रहने वाले विरक्त महात्मा को भी भोजन, प्रकाश, माला, कमण्डल, आसन, खड़ाऊँ, पुस्तक, कम्बल, आग आदि वस्तुओं की आवश्यकता होती है।
विज्ञापन


इनके बिना उनका जीवित रहना भी सम्भव न होगा। इतनी भौतिकता तो गुफा निवासी महात्मा को भी बरतनी पड़ेगी और अपने परिवार के प्रति प्रेम और त्याग बरतने की आध्यात्मिकता चोर-उठाईगीर और भौतिक सुखों में लिप्त व्यक्ति को भी रखनी पड़ेगी।

भौतिकता को तमतत्व और आध्यात्मिकता को सततत्व, माना गया है। दोनों के मिलने से रजतत्व बना है। इसी में मानव की स्थिति हैं। एक के भी समाप्त जाने पर मनुष्य का रूप नहीं रहता। तम नष्ट होकर सत ही रह जाए तो व्यक्ति देवता या परमहंस होगा। यदि सत नष्ट होकर तम ही रह जाए तो असुरता या पैशाचिकता ही बची होगी। दोनों स्थितियों में मनुष्यत्व समाप्त हो जाएगा।
विज्ञापन


इसलिए मानव जीवन की स्थिति जब तक है, तब तक भौतिकता और आध्यात्मिकता दोनों ही साथ-साथ रहती हैं। अन्तर केवल प्राथमिकता का है। सज्जनों के लिए आध्यात्मिकता ही प्रमुख रहती है, वे उसकी रक्षा के लिए भौतिक आधार की बहुत अंशों तक उपेक्षा कर सकते हैं।

इसी प्रकार दुर्जनों के लिए भौतिकता का स्थान पहला है। वे भौतिक लाभों के लिए आध्यात्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी कर देते हैं। इतने पर भी दोनों ही प्रकृति के लोग किसी न किसी रूप में भौतिक और अध्यात्मिक तथ्यों को अपनाते ही हैं, या उन्हें अपनाये ही रहना पड़ता है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें