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आपको गुस्सा क्यों आता है? जानिए इस सवाल का जवाब

Sat, 06 Dec 2014 03:49 PM IST
गुरु मां आनंदमूर्ति/अध्यात्मिक गुरू
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क्रोध क्यों आता है? आसान जवाब है-हमने अपने दिमाग में कुछ योजनाएं बना रखी होती हैं, जब वे पूरी नहीं होतीं, तब क्रोध आता है। हमने कुछ अपेक्षाएं खडी कर रखी होती हैं, जब वे पूरी नहीं होती हैं, तब क्रोध आता है। याद रहे, तुम अपनी महत्वाकांक्षाओं के साथ कभी भी संतोष का अनुभव नहीं कर सकते।
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आज तुम कहते हो, मेरे पास यह चीज नहीं है, काश! मेरे पास यह चीज हो जाए। फिर कल कहोगे कि मेरे पास वह चीज नहीं है, काश! मेरे पास वह चीज हो जाए। इसका तो कोई अंत नहीं है।

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क्रोध से तुम तब तक नहीं बच सकते, जब तक तुम अपनी महत्वाकांक्षाओं को छोड़ोगे नहीं। हम लोग दुखी इसलिए होते हैं कि हमें दूसरों के जीवन में सुख दिखता है। हम अपने दुखों से दुखी नहीं हैं। हम दूसरों के सुखों से दुखी हैं। एक युवक ने गुरु से अपनी इन्हीं शंकाओं का समाधान जानना चाहा। गुरु ने कहा कि ये सब मेरे शिष्य हैं, मैं इनका गुरु हूं। इस नाते, इनके प्रति मेरे कुछ कर्तव्य हैं।
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इनके भी कुछ कर्तव्य हैं। सभी अपने-अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे हैं। किसी को भोजन बनाना है, किसी को सफाई करनी है, किसी को लिखने का काम करना है। युवक ने कहा कि आपका क्या काम होता है? गुरु ने कहा-मेरा काम है इनका मार्गदर्शन करना। मेरा काम है इनके साथ बैठना, इनकी समस्याओं को सुनना और उनको सुलझाना और इनका काम है, जो कुछ मैं इनसे कहूं, उसे पूरा करना। अगर मैं कहूं कि प्राणायाम करो, तो करना। अगर मैं कहूं कि सेवा करो, तो सेवा करें।
 
नवयुवक कहता है कि यह तो बहुत अच्छी जगह है। अब तो मैं यहीं रहूंगा, पर मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या मैं गुरु बनकर रह सकता हूं? क्योंकि गुरु का काम तो सबसे सहज है,  बैठो, बात करो, दर्शन दो, फूल लो, सेवा लो, थोड़ी बात कर लो, बाकी सारा बड़ा काम तो शिष्यों को करना पडता है।

गुरु ने जवाब दिया कि देखो तुम निश्चित ही गुरु बनकर रह सकते हो। लेकिन इसके लिए तुम्हें पहले विद्यार्थी, विद्यार्थी से शिक्षक, शिक्षक से आचार्य, आचार्य से गुरु बनने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और जिस दिन सारा क्रम तुम पूरा कर लोगे, उस दिन तुम गुरु कहलाओगे।

दरअसल, महत्वाकांक्षा चाहे जिस चीज के लिए हो, दुखदायी है। क्रोध ऊर्जा है, क्रोध को करुणा में बदला जा सकता है। अब यह प्रश्न है कि क्रोध को करुणा में कैसे बदला जाए? आप अपनी महत्वाकांक्षा को भी बनाए रखें और क्रोध से भी छूट जाएं, यह नहीं हो सकता।

क्रोध रहित जीवन के लिए आवश्यक है कि आप अपनी खुशी को किसी विशेष स्थिति में सीमित न करें और दूसरों को न देखें। अगर आप ये दो काम कर सके, तो बहुत आनंद से रह सकेंगे।
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