डर से बचने के लिए आपको अपना शरीर छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। आपको बस इतना करना है कि अपने शरीर से थोड़ी सी दूरी बनानी है। आपको अपने मन से भी थोड़ी दूरी बनानी है। एक बार अगर थोड़ी दूरी बन गई, तो फिर आपको भला किस बात का डर होगा?
मान लीजिए, आपके पास एक बहुत पुराना फूलदान है, आपको हमेशा यह बताया गया कि यह बहुत भाग्यशाली फूलदान है। अगर मैं आकर उस फूलदान को तोड़ दूं तो क्या होगा? आपके दिल में डर बैठ जाएगा कि अब आपके साथ बुरा होने वाला है। डर जीवन से पैदा नहीं होता है, बल्कि यह आपके भ्रमित मन की उपज है।
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आप वास्तव में भविष्य के बारे में कुछ नहीं जानते। आप सिर्फ अतीत का एक टुकड़ा लेकर उसे कुछ शक्ल देने की कोशिश करते हैं और सोचते हैं कि यही भविष्य है। आप भविष्य की योजना बना सकते हैं, लेकिन उसमें जी नहीं सकते।
लोग भविष्य में जी रहे हैं और यही चीज उनके डर की वजह है। बचने का एक ही तरीका है कि आप वास्तविकता के धरातल पर उतरें। आप पाएंगे कि आप हमेशा ये सोचकर डरते हैं कि आने वाले समय में क्या होगा।
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आपका डर उस बात को लेकर, जो अभी हुई नहीं है। इसका मतलब है कि फिलहाल इसका कोई अस्तित्व नहीं है। डरने का मतलब है कि आप ऐसी चीज से परेशान हो रहे हैं, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं है।