भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आप पूजा के बाद आरती जरूर गाते होंगे। याद कीजिए आपके जेहन में सबसे पहले कौन सी आरती आती है। निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि वह आरती है 'ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।'
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इस आरती को लिखने वाले प्रभु भक्त और लेखक का नाम है 'पं. श्रद्घाराम फिल्लौरी'। इनका जन्म तत्कालीन पंजाब के फिल्लौरी नामक स्थान पर 1837 में हुआ था और 1881 में 24 जून को इन्होंने दुनिया से अंतिम विदाई ली। आज इनकी 133वीं पुण्यतिथि है।
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इन्होंने ओम जय जगदीश हरे आरती की रचना 1870 ई. में की थी। इनकी यह रचना उन दिनों भी उतनी ही लोकप्रिय थी जितनी आज है।
पं. श्रद्घाराम फिल्लौरी ने हिन्दी, संस्कृत, पंजाबी आदि भाषाओं में कई पुस्तकें लिखी है। भाग्यवती नामक इनकी पुस्तक को हिन्दी का पहला उपन्यास माना जाता है।