मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जीवन संघर्ष से भरा हुआ रहा। हर पथ पर उन्हें संघर्ष करना पड़ा। जानते हैं इतने संघर्ष के बाद भी उन्होंने जीवन में सफलता कैसे पाई? संयम से भगवान श्री राम ने जीवन पथ में विजय प्राप्त की और सभी को यह सन्देश भी दिया की जीवन में संयम रखना कितना आवश्यक है। आइए, आज समझते हैं संयम रखने के महत्त्व को। मात्र संयम रखने से ही व्यक्ति विजय प्राप्त कर लेता है।
- जीवन में कभी- कभी हालात इस तरह हमारे विपरीत हो जाते हैं कि हम हार मान जाते हैं और तुरंत ही उन हालातों के वश में हो जाते हैं। हम बिलकुल भी संयम नहीं रख पाते हैं। जबकि उस समय सबसे अधिक आवश्यकता ही संयम और धैर्य रखने कि होती है। ऐसा समय भगवान श्री राम के जीवन में भी कहीं बार आया।
- 14 वर्ष के वनवास के दौरान जब लंका नरेश रावण माता सीता को चुरा कर ले गया तब लंका जाने के लिए मार्ग में समुद्र सबसे बड़ा अवरोध बन हुआ था। कोई और दूसरा मार्ग नहीं होने के कारण सभी चिंता में डूबे हुए थे कि इस मार्ग को कैसे पार किया जाएगा। भगवान श्री राम के लिए तो कुछ भी मुश्किल नहीं था, वो चाहते तो पल भर में समुद्र को सूखा देते परंतु उन्होंने ऐसा न करते हुए धैर्य और संयम से उस समय काम लिया।
- लक्ष्मण जी चाहते थे की समुद्र को सूखा कर आगे बड़ा जाए, परंतु भगवान राम ने ऐसा नहीं किया और समुद्र से विनती की आगे का मार्ग देने की। कुछ समय बाद समुद्र ने खुद ही आगे का मार्ग बताया। यह भगवान श्री राम के धैर्य और संयम का ही परिणाम था की उन्हें हर जगह विजय प्राप्त हुई।
- सफलता हासिल करने के लिए हमे सबसे पहले जीवन में संयम और धैर्य को अपनाना होगा। संयम का होना अति आवश्यक है।