प्रगति और खुशी की तलाश सभी को है, हर कोई इसकी तलाश कर रहा है। आखिर दुखी तो कोई नहीं होना चाहता। लोग अलग-अलग तरीकों से खुशियां पाने की कोशिश करते हैं। कुछ लोग दौलत और भौतिक चीजों में खुशियां ढूंढते हैं, तो कुछ नाम, शोहरत और रिश्तों में इसे खोजते हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो शराब और अन्य नशीले पदार्थों में खुशियां ढूंढने की कोशिश करते हैं।
ज्यादातर लोग, अपनी इच्छाएं पूरी करके खुशी पाना चाहते हैं। हमारी इच्छा एक कार खरीदने की हो सकती है, घर खरीदने की हो सकती है। जिंदगी भर हम एक के बाद दूसरी इच्छा की पूर्ति में ही लगे रहते हैं। होता क्या है कि हमारी इच्छाएं कभी खत्म ही नहीं होतीं।
जैसे ही एक इच्छा पूरी होती है, दूसरी इच्छा हमारे अंदर जाग जाती है। जब हम वो पूरी कर लेते हैं, तो कोई अन्य इच्छा उसकी जगह ले लेती है। हमारा जीवन ऐसे ही चलता रहता है। यह सच है कि आधुनिक संस्कृति आज हमारे मन में नई-नई इच्छाओं को जन्म देती जा रही है। रेडियो, टेलीविजन आदि पर विज्ञापनों की होड़ लगी रहती है। विज्ञापनकर्ता हमें बताते हैं कि हमारे पास फलां इलैक्ट्रॉनिक सामान होना चाहिए, ऐसी नई गाड़ी होनी चाहिए।