राजा अनंगपाल के राज अवंती में महामारी फैली। और लोग मरने लगे। शासन ने बहुतेरे उपाय कराए, पर उसका कुछ असर न हुआ। लोग मरत रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आकाश के देवता ने कहा, तुम्हारी राजधानी के बीचोबीच एक सूखा कुआं है। लोगों से कहो कि अमावस की रात राज्य के प्रत्येक घर से एक-एक लोटा दूध उस कुएं में डाला जाए। यह काम होते ही महामारी रुक जाएगी और लोगों का मरना बंद हो जाएगा। अनंगपाल ने तुरंत राज्य में घोषणा करा दी कि अमावस की रात को हर घर से कुएं में एक-एक लोटा दूध डालना अनिवार्य है।
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अमावस की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था, उसी रात अवंती नगर में ही रहने वाली एक वृद्ध स्त्री ने सोचा कि अगर मैं दूध की जगह एक लोटा पानी डाल दूं, तो किसी को क्या पता चलेगा? इसी विचार से उस वृद्धा ने कुएं में चुपचाप एक लोटा पानी डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई, तो अनंगपाल ने देखा कि लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था। महामारी रुकी नहीं थी। राजा ने कुएं के पास जाकर कारण जानना चाहा, तो उसने देखा कि सारा कुआं पानी से भरा है।
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उसमें दूध की एक बूंद नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण महामारी दूर नहीं हुई और लोग अब भी मर रहे हैं। दरअसल ऐसा इसलिए हुआ कि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था, वैसा ही विचार राज्य के लोगों के मन में भी आया और किसी ने कुएं में दूध नहीं डाला। जिस राज्य में स्वार्थी और कृपण लोग रहत हों, वहां किसी का हित नहीं सध सकता। इसका कारण सिर्फ यह है कि लोग छोटी-छोटी बातों में अपनी संकीर्ण लालसाओं की ही परवाह करते हैं।