माधव की कहानी, जिसे उसके बॉस ने एक कहानी के जरिये भ्रम से निकाला।
माधव के ऑफिस में कई लोग उसके अच्छे काम से चिढ़ते थे। एक दिन माधव खाना खाने गया, तो उसे अपने पीछे वाली मेज से कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। माधव कान लगाकर सुनने लगा। दो लोग प्रमोशन की बातें कर रहे थे। एक ने कहा, इस बार वह चाहे जो भी करे, उसे प्रमोशन नहीं मिलने वाला। दूसरा बोला, ऐसा क्यों? पहला बोला, बॉस ने कहा है कि वह अगले महीने तक माधव को किसी बहाने बाहर निकाल देंगे। यह सुनकर माधव के होश उड़ गए।
एक हफ्ते के बाद बॉस ने माधव को बुलाकर कहा, आजकल तुम्हारे काम की गति कुछ धीमी हो गई है। क्या बात है? माधव को लगा कि जो उसने सुना था, वह सच हो रहा है। वह बोला, मुझे पता है कि आप मुझे निकालना चाहते हैं। बॉस हैरान रह गए। उन्होंने पूछा, यह तुमसे किसने कहा? माधव ने पूरी घटना उन्हें सुनाई। बॉस बोले, एक जंगल में एक गधा रहता था। वह शेर का अच्छा मित्र था। शेर हर रोज एक जानवर को खा जाता था, पर चूंकि गधा उसका दोस्त था, इसलिए वह उसकी तरफ देखता भी नहीं था। लोमड़ी को यह बात नहीं पचती थी। एक दिन जब गधा पेड़ के नीचे सुस्ता रहा था, तो लोमड़ी और खरगोश पेड़ के पीछे जाकर फुसफुसाने लगे।
लोमड़ी बोली, पता है, गधा अब तक कुंवारा क्यों है? क्योंकि जो भी गधी जंगल में आती है, शेर उसे खा जाता है। गधे को इस बात से बड़ी ठेस लगी। लोमड़ी की वजह से गधे और शेर के बीच में दरार आ गई। एक दिन शेर को गधे ने शिकार करने से रोक दिया। शेर ने उसे बहुत समझाया, पर गधा नहीं समझा। अंततः बेचारा गधा गुस्सैल शेर का शिकार बन गया। बॉस बोले, माधव, लोमड़ी तुम्हें हर जगह मिलेगी, जो तुम्हारे रिश्ते और तुम्हारे काम को खराब करने की कोशिश करेंगी। अब यह तय तुम्हें करना है कि तुम क्या बनोगे?