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बाप रे बाप मरने के बाद आत्मा को इतना पैदल चलना पड़ता है!

Fri, 20 Sep 2013 10:54 AM IST
टीम डिजिटल
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मरने के बाद पिण्डदान से व्यक्ति का एक सूक्ष्म शरीर बनता है। इस शरीर में बसकर आत्मा को एक साल में इतनी दूरी तय करनी पड़ती है जितनी दूरी कोई भी व्यक्ति पूरे जीवन में नहीं चलता होगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि इस दूरी को तय करने के लिए न तो आपको मोटर साईकल मिलने वाली है और न कार, यह दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है।
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अगर आप इसे कोरी कल्पना मान रहे हैं तो इस बात को मन से निकाल दीजिए। हम आपको बता दें कि यह उन ग्रंथों में लिखा है जिसके सामने हर हिन्दू अपना सिर झुकाता है। भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के संवाद पर आधारित पुराण गुरुड़ पुराण सहित विष्णु पुराण एवं कठोपनिषद् में भी इस बात का उल्लेख किया गया है।

क्या आपको पता है मरने के समय आवाज क्यों बंद हो जाती है?

गरुड़ पुराण के पहले अध्याय में लिखा है कि व्यक्ति के मृत्यु के बाद पापी मनुष्य को ढाई मुहूर्त में यानी लगभग 24 घंटे में यमदूत वायुमार्ग से यमलोक ले जाते हैं। यहां यमराज व्यक्ति के कर्मों का लेखा जोखा करते हैं इसके बाद यमदूत वापस व्यक्ति की आत्मा को लेकर पृथ्वी पर आते हैं।
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यहां 13 दिनों में परिजनों द्वारा दिये गए पिण्डदान से व्यक्ति का सूक्ष्म शरीर तैयार होता है। इस सूक्ष्म शरीर में बसकर आत्मा तेरहवीं के दिन यमलोक की यात्रा शुरू करता है। इस बार आत्मा को वायु मार्ग से नहीं बल्कि पैदल यमलोक की यात्रा करनी पड़ती है। गरुड़ पुराण के अनुसार यमलोक की दूरी 99 हजार योजन है यानी 11 लाख 99 हजार 988 किलोमीटर। इस यात्रा में कई भयानक स्थान है जिनके बारे में हम आपको कल बताएंगे।
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