जिस तरह पृथ्वी की अदालत में जज साहब वकीलों की दलील सुनकर न्याय करते हैं उसी प्रकार यमलोक में यमराज जज हैं। यहां चित्रगुप्त आरोपी यानी प्रेतात्माओं के कर्मों का ब्यौरा देते हैं। जिस व्यक्ति के पास पुण्य की पूंजी नहीं होती है उसको देखकर यमराज की आंखें आंगार की तरह लाल हो जाती है और महाभयानक यम का रौद्र रूप प्रकट होता है। यम के इस रूप को देखकर प्रेतात्मा दहल उठता है।
क्रोध में भरे हुए यमराज अपने दूतों को आवाज देते हैं। चंड और प्रचंड नाम के दो प्रमुख दूतों के अलावा यम के दूसरे दूत पाश में बांधकर पापी प्रेतात्माओं को यमराज की अदालत से लेकर नर्क ओर ले जाते हैं। गुरूड़ पुराण में बताया गया है कि यम के दरवार में चार दरवाजे हैं। यम द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद जो लोग पापी होते हैं उनकी आत्माओं को यमदूत दक्षिण दरवाजे से लेकर जाते हैं।
यमराज के ये दूत हर पल आप पर नजर रखते हैं
जिनके पास पुण्य होता है यानी जो लोग जीवन में धर्म-कर्म करते हैं वह उत्तर, पूर्व एवं पश्चिम दिशा के द्वार से जाते हैं। इस दिशाओं से जाने वालों को स्वर्ग एवं पितृ लोक में अपने कर्मों के अनुसार सुख प्राप्त होता है। दक्षिणी द्वार से जिन लोगों को ले जाया जाता है उन्हें यमदूत पेड़ से लटका कर पहले खूब पीटते हैं और तरह तरह की यातनाएं देते है। इसके बाद उन्हें अलग-अलग नर्क में ले जाया जाता है। अलग-अलग नर्क में मिलने वाले दंड के बारे में अगले अंक में जानेंगे।
हिमाचल में यमराज का एक मंदिर है। इस मंदिर में भी चार दरवाजे हैं। माना जाता है कि मरने के बाद व्यक्ति की आत्माओं को यमदूत सबसे पहले यहीं लेकर आते हैं। यहां यम का न्याय होने के बाद यमदूत व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उन्हें अलग-अलग द्वार से लेकर बाहर जाते हैं। यमराज के इस मंदिर के बारे में यहां विस्तार से बताया गया है।