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Mahabharat: आखिर क्यों घरों में नहीं रखी जाती ‘महाभारत’? जानिए इसका कारण

Fri, 28 Jun 2024 05:58 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महाभारत - फोटो : अमर उजाला
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Mahabharat: हम सभी को बचपन से ही भगवान राम के बारे में बताया जाता है। उनके संघर्ष, परिश्रम और वीरता की कहानियां सभी को सुनाई जाती है। यही नहीं घरों में भी रामायण ग्रथ को रखा जाता है, क्योंकि इसका शुभ प्रभाव परिवार पर पड़ता है। वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में श्रीराम के जीवन का उल्लेख है। इसमें उनके वचन, धैर्य और संघर्षों का जिक्र है। ऐसी मान्यता है कि रोजाना इसका पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं कुछ लोगों का गीता के प्रति अधिक श्रद्धा भाव होता है। वह नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं।

आज भी गीता के उपदेश युवाओं को मार्गदर्शित करने में सहायता करते हैं। मान्यता है कि इसका पालन करने पर व्यक्ति बड़ी से बड़ी परिस्थितियों को मात देकर विजय प्राप्त कर सकता हैं। हिंदू धर्म में इन दोनों ही ग्रंथों को बेहद शुभ माना गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर महाभारत को घरों में क्यों नहीं रखा जाता है ? जिसमें की महाभारत को 5वां वेद भी कहा जाता है। साथ ही उसकी गणना विश्व के महाकाव्य के रूप में की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि घरों में महाभारत क्यों नहीं रखा जाता।

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इसलिए नहीं रखी जाती घर में महाभारत
महाभारत की रचना वेदव्यास ने की है। इसे एक महान ग्रंथ के रूप में पढ़ा जाता है। इसमें जीवन से जुड़ी कई समस्याओं का हल है। लेकिन फिर भी लोग इसे घर में नहीं रखते हैं, क्योंकि महाभारत को घर में रखने से कलह बढ़ती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत में सिंहासन के लालच में दो भाई एक दूसरे के खिलाफ युद्ध में उतरे थे। ऐसे में इसे घर में रखने से भाइयों में विवाद हो सकता है। साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच युद्ध जैसी स्थिति भी बन सकती है। इसलिए महाभारत को घर में रखने की मनाही होती है। यही नहीं इससे जुड़ी तस्वीर भी रखना अशुभ माना जाता है।

महाभारत के कुछ प्रेरक श्लोक क्या हैं?
नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नरोत्तमम्।

देवीं सरस्वतीं चैव ततो जयमुदीरयेत्॥

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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