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जानिए क्यों नहीं चढ़ाई जाती है गणेशजी को तुलसी, क्या है पौराणिक कथा

Thu, 13 Apr 2023 11:45 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना की जाती है। हर पूजा-पाठ में सबसे पहले इनका आवाहन किया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न पूरा हो सके।
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Lord Ganesha: कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना की जाती है। - फोटो : istock
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विस्तार
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बुधवार के दिन श्रीगणेश की पूजा का विधान है। बुधवार के दिन श्रीगणेश की पूजा करने से भक्तों के कष्ट मिट जाते हैं, भक्तों का हर विघ्न दूर हो जाता है और घर में शुभता का वास बना रहता है। कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने से पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की वंदना की जाती है। हर पूजा-पाठ में सबसे पहले इनका आवाहन किया जाता है, ताकि कार्य निर्विघ्न पूरा हो सके। मान्यता के अनुसार गणेशजी की पूजा में उन्हें कई प्रकार के मोदकों का भोग लगाया जाता है इसके साथ ही उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, पुष्प, इत्र, सिंदूर आदि अर्पित किया जाता है। लेकिन कभी भी भगवान गणेश को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। आइए जानते हैं क्या है इसका कारण।

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इसलिए नहीं चढ़ाई थी तुलसी
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार गणेशजी गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान धर्मात्मज की कन्या तुलसी विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर निकली। देवी तुलसी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पहुंची। गंगा तट पर देवी तुलसी ने देखा कि युवा गणेशजी तपस्या में लीन थे। शास्त्रों के अनुसार तपस्या में विलीन गणेश जी रत्न जटित सिंहासन पर विराजमान थे। उनके समस्त अंगों पर सुगन्धित चंदन लगा हुआ था। उनके गले में पारिजात पुष्पों के साथ स्वर्ण-मणि रत्नों के अनेक सुन्दर हार थे। उनकी कमर में अत्यन्त कोमल रेशम का लाल पीताम्बर लिपटा हुआ था। 

देवी तुलसी श्रीगणेश के इस सुंदर स्वरूप पर मोहित हो गईं। उनके मन में गणेश से विवाह करने की इच्छा जाग्रत हुई। तुलसी ने विवाह की इच्छा से उनका ध्यान भंग किया। तब भगवान श्री गणेश ने तुलसी द्वारा तप भंग करने को अशुभ बताया और तुलसी की मंशा जानकर स्वयं को ब्रह्मचारी बताकर उसके विवाह प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। विवाह प्रस्ताव ठुकराने पर तुलसीजी ने नाराज होकर गणेशजी को शाप दिया कि उनके एक नहीं बल्कि दो-दो विवाह होंगे। इस पर श्री गणेश ने भी तुलसी को शाप दे दिया कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा। एक राक्षस की पत्नी होने का शाप सुनकर तुलसी ने गणेशजी से माफी मांगी। तब गणेशजी ने तुलसी से कहा कि तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण राक्षस से होगा। किंतु फिर तुम भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को प्रिय होने के साथ ही कलयुग में जगत के लिए जीवन और मोक्ष देने वाली होगी, पर मेरी पूजा में तुलसी चढ़ाना शुभ माना जाएगा। तब से ही भगवान श्री गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना गया है।
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