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जब शनि पर भारी पड़ा रावण, लेकिन शनि ने एक चाल से दी मात...

Thu, 12 Dec 2019 03:31 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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शनि- रावण युद्ध
रावण ज्योतिष विद्या का प्रकाण्ड विद्वान था। कहते हैं एक बार उसने अपने ज्योतिष ज्ञान के बल से सभी ग्रहों को अपने एक स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया था। इस दौरान जब सभी ग्रह रावण के भय से त्रस्त थे। उसी समय कर्मफलदाता शनि ने रावण के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। पौराणिक शास्त्रों में इस घटना का जिक्र कुछ इस प्रकार है...
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नवग्रह - फोटो : डेमो
रावण ने अजेय पुत्र की प्राप्ति के लिए सभी ग्रहों को था साधा
रावण की पत्नी मंदोदरी जब मेघनाथ को जन्म देने वाली थी। तब रावण ने नवग्रहों को एक निश्चित स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया था जिससे उत्पन्न होने वाला पुत्र अत्यंत तेजस्वी, शौर्य, पराक्रम से युक्त हो। रावण ने सभी ग्रहों का ऐसा समय साध लिया था जिस समय में अगर किसी का जन्म हो तो वह अजेय एवं दीर्घायु का हो।
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शनि ग्रह - फोटो : saturn
शनि के विद्रोह से मेघनाथ हुआ अल्पायु
लेकिन जब मेघनाद का जन्म हुआ तो बाकि सारे ग्रहों ने आज्ञा का पालन किया लेकिन ठीक उसी समय शनि ग्रह ने अपनी स्थिति में परिवर्तन कर लिया। जिस स्थिति में शनि के होने की वजह से रावण का पुत्र दीर्घायु होता, स्थिति परिवर्तन से वही पुत्र अब अल्पायु हो गया। रावण इससे अत्यंत क्रोधित हो गया।

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रावण - प्रतीकात्मक - फोटो : Social Media
क्रोधित रावण ने शनि की तोड़ी टांग
इस भयंकर क्रोध में उसने शनि के ऊपर गदा का प्रहार किया जिससे शनि के पैर में चोट लग गयी और वो पैर से कुछ लाचार हो गए अर्थात लंगड़े हो गए। इन सब वजहों से रावण-पुत्र मेघनाद, प्रचंड पराक्रमी, तेजस्वी और शौर्यवान तो था लेकिन वह अल्पायु था जो रामायण के युद्ध में लक्ष्मण के द्वारा मारा गया था।
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शनि ग्रह
सबका न्याय करने वाले हैं शनि
अगर शनि ग्रह विद्रोह नहीं करता तो मेघनाथ को हरा पाना संभव नहीं था। शनि का विद्रोह रामायण युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से अधर्म का नाश और धर्म की विजय के लिए काम आया। शनि ग्रह सबका न्याय करने वाले हैं। जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, शनि उसे वैसा ही फल देते हैं।
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