फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budhwar Vrat Katha: जीवन में सुख-समृद्धि के लिए रखें बुधवार का व्रत, जानिए बुधवार व्रत कथा और आरती

Wed, 27 Jul 2022 06:55 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बुधवार का दिन सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश को समर्पित होता है। बुधवार के दिन उपवास रखने का विशेष महत्व होता है क्योंकि बुधवार के देवता भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं।
विज्ञापन
बुधवार व्रत कथा (Budhwar Vrat Katha) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Budhwar Vrat Katha And Puja Aarti: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह के सभी सातों दिन अलग-अलग देवी- देवताओं को समर्पित होते हैं। फिर उन्हीं के अनुसार पूजा-आराधना की जाती है। बुधवार का दिन सभी देवी-देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश को समर्पित होता है। बुधवार के दिन उपवास रखने का विशेष महत्व होता है क्योंकि बुधवार के देवता भगवान गणेश बुद्धि के देवता हैं। ऐसे में बुधवार के दिन व्रत रखने पर जीवन में सुख-समृद्धि आती है और समय मंगलमय रहता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति बुधवार के दिन व्रत रखता है और पूरे दिन भगवान गणेश की साधना करता है उस व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन और धान्य की कमी नहीं होती है। आइए जानते हैं बुधवार व्रत की कथा और पूजा आरती।

विज्ञापन


बुधवार व्रत कथा (Budhwar Vrat Katha):
एक समय की बात है एक व्यक्ति का विवाह हुए कई वर्ष बीत गए। विवाह के बाद उसकी पत्नी एक बार अपने मायके गई हुई थी। पत्नी के मायके में रहने के कई दिनों बाद उसका पति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिए ससुराल पहुंचा। ससुराल में कुछ दिन तक रहने के बाद वह पत्नी को मायके से विदा करने की बात अपने सास-ससुर के कही। बुधवार का दिन होने के कारण उसके सास-ससुर ने कहा कि इस दिन बेटी ससुराल नहीं जा सकती इस कारण विदाई नहीं हो सकती है। लेकिन वह व्यक्ति नहीं माना और अपनी पत्नी को मायके से विदा कराकर अपने घर की तरफ चल दिया। रास्ते में जाते वक्त पत्नी को बहुत तेज से प्यास लगी तब पति पानी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा। काफी देर के बाद जब वह पानी लेकर वापस लौटा तो उसने देखा कि पत्नी के पास उसी की वेशभूषा में कोई अन्य व्यक्ति पत्नी के संग बैठकर बाते करता हुआ दिखाई दिया।

दोनों व्यक्ति आपस में लड़ने लगे। पहले व्यक्ति ने गुस्से में दूसरे व्यक्ति से पूछना लगा कि वह कौन और क्यों उसकी पत्नी के साथ बैठकर बाते कर रहा है। फिर आपस में लड़ने लगे।  दूसरे व्यक्ति ने कहा कि यह मेरी पत्नी है। दोनों की बीच भयानक लड़ाई होने लगी तब वहां पर कुछ सिपाही आ गए और स्त्री से उसके असली पति के बारे में पूछने लगे। दोनों व्यक्ति को देखकर स्त्री हैरान हो गई कि कौन मेरा पति है। वह दुविधा में पड़ गई क्योंकि दोनों एक जैसे ही लग रहे थे। तब पहला व्यक्ति परेशान होकर मन में कहा कि भगवान ये आपकी कैसी लीला है। तभी आकाशवाणी हुई की बुधवार के दिन पत्नी को विदा करवा कर नहीं ले जाना चाहिए था। यह सब सुनकर पहला व्यक्ति समझ गया की यह भगवान बुध की लीला है। फिर वह व्यक्ति बुद्धदेव से प्रार्थना करने लगा और क्षमा मांगने लगा। फिर फौरन ही बुद्धदेव अंतर्ध्यान हो गए और उस व्यक्ति को अपनी पत्नी मिल गई। तभी से हर दिन बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा होने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


Budhwar Vrat Puja Aarti (बुधवार पूजा आरती) 

आरती युगलकिशोर की कीजै. तन मन धन न्यौछावर कीजै..

गौरश्याम मुख निरखत रीजै. हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै..

रवि शशि कोट बदन की शोभा. ताहि निरखि मेरो मन लोभा..

ओढ़े नील पीत पट सारी. कुंजबिहारी गिरवरधारी..

फूलन की सेज फूलन की माला. रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला..

कंचनथार कपूर की बाती. हरि आए निर्मल भई छाती..

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी. आरती करें सकल ब्रज नारी..

नन्दनन्दन बृजभान, किशोरी.  परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ..

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें