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बन सकते थे नायक, हालात ने बना दिया इन 5 को सबसे बड़ा खलनायक

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दुनिया में सभी अपना नसीब लेकर आते हैं कोई अपने कर्मों से नायक तो कोई खलनायक बन जाता है। लेकिन सच कहा जाए तो कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि उसे एक खलनायक के रूप में याद किया जाए। क्या आप यह चाहेंगे कि आप एक खलनायक एक तौर पर याद किए जाएं, आपका जवाब होगा नहीं।
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लेकिन जिंदगी की जंग में कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि अच्छे से अच्छा व्यक्ति भी ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो जाता है जो दुनिया और समाज की नजर में खलनायक के काम माने जाते हैं।

रावण हो या कंश सभी हालात के मारे थे। अगर आप रावण की स्थिति और कंश के हालात पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि उनके जैसी स्थिति यदि आपकी होती तो आप क्या करते? आइये देखें इतिहास के पन्नों में मौजूद उन खलनायकों के हालात जिन्होंने इतिहास में उन्हें बदनाम कर दिया।
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पाप या मजबूरी थी सीता का हरण

इतिहास के पन्नों में सबसे बदनाम है रावण। रावण पर इल्जाम है कि उसने एक विवाहिता स्त्री का हरण किया था। इसने अपने भाई को देश से निकाल दिया था। इसने अपनी जिद्द में पूरे कुल को युद्ध में झोंक दिया।

लेकिन रावण की परिस्थिति पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि अगर आप उसकी जगह पर होते तो शायद आप भी यह कदम उठा सकते थे। रावण ने सीता का हरण उन परिस्थितियों में किया जब उसकी बहन सूर्पणखा की नाक लक्ष्मण ने काट ली थी।

नाक कटने का अर्थ मान भंग होना भी होता है। यानी अपनी बहन का मान भंग होने पर कोई भी भाई बदला लेने की सोच सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो पुरुष अपनी स्त्री, मां और बहन के मान की रक्षा नहीं कर सकता उसे पुरुष कहलाने का भी अधिकार नहीं है।

रावण ने सीता का हरण किया ताकि राम और लक्ष्मण भी उसकी तरह ही अपमान महसूस करें। विभिषण ने कायर की तरह सांधि करने का प्रस्ताव रखा इसलिए रावण ने उसे देश निकाला दिया और अपने मान और सम्मान के लिए परिजनों के साथ युद्ध में प्राण न्यौछावर किए।

धार्मिक पक्ष यह भी कहता है कि रावण जानता था कि राम नारायण अवतार हैं और उनके हाथों मृत्यु से मुक्ति मिल जाएगी इसलिए राजा होने के नाते उसने अपने साथ साथ पूरी प्रजा को भी मुक्ति दिलाई। अगर रावण पापी और खलनायक होता तो राम कभी भी रावण के शव को प्रणाम नहीं करते और न अपने भाई को रावण से ज्ञान लेने के लिए उसके पास भेजते।

इतिहास में बदनाम है यह बहन के बच्चों का हत्यारा

रावण के बाद जो इतिहास में सबसे बदनाम है वह है 'कंस'। इसका चरित्र इतिहास ने ऐसा बनाया है कि कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों का नाम कंस नही रखता। कारण यह है कि इसके ऊपर बड़ा इल्जाम यह है कि इसने अपने पिता, बहन और जीजा को बंदी बनाकर रखा।

लेकिन इसके ऊपर सबसे बड़ा इल्जाम है कि इसने अपने 6 भांजों की हत्या अपने हाथों से की। लेकिन अगर आप कंस की उन स्थितियों को समझेंगे कि क्यों कंस खलनायक बना तो आपकी कंस के प्रति घृणा कम हो सकती है।

यह कंस के भाग्य की विडंबना थी कि जब वह अपनी लाडली बहन देवकी की शादी करवाकर उन्हें ससुराल विदा कर रहा था उसी समय उसे पता चला कि उसकी मौत देवकी के पुत्र के हाथों होगी। कंस कोई भगवान नहीं था जो अपनी निश्चित मौत को देखकर भी शांत रहता और उसे टालने के उपाय न करता।

कंस ने उस समय जो किया संभव है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति अपनी मौत के डर से कर सकता था। कंस ने पिता को बंदी बनाकर स्वयं राजगद्दी संभाली ताकि देवकी और वासुदेव को बंदी बनाने पर उसे राजदंड नहीं मिले। कंस अगर वास्तव में बुरा होता तो देवकी के बच्चों को मारने की बजाय सीधा देवकी और वासुदेव को मार सकता था। लेकिन उसने उन्हें ही मारा जिनसे उसे खतरा था।

शास्त्रों में भी कहा गया है कि ' आत्मा रक्षितो धर्मः।' यानी अपनी रक्षा करना धर्म है। ऐसे में कंस ने अपने जीवन की रक्षा के लिए जो किया वह उसकी बुद्धि के अनुसार शास्त्र के अनुसार ही था।

अगर कंस वास्तव में बुरा और खलनायक था तो भगवान श्री कृष्ण ने कंस को उस समय अपने नारायण रूप के दर्शन क्यों कराए जब कंस के प्राण शरीर से निकल रहे थे।

शास्त्रों में मौजूद कथा के अनुसार रावण का अगला जन्म कंस के रूप में हुआ था। कंस को पता था कि कृष्ण नारायण रूप हैं इसलिए पूर्व जन्म में रावण की भांति कंस के रूप में भी इसने नारायण के हाथों कई राक्षसों का वध करवाया ताकि उन्हें भी मुक्ति मिल सके।

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इस औरत ने किए ऐसे काम हो गई बदनाम
रामायण में एक स्त्री का नाम खलनायक तौर पर लिया जाता है। इस स्त्री का नाम है मंथरा। मंथरा पर यह आरोप लगाए जाते हैं कि इसने ही कैकेयी के मन में रावण के प्रति विष घोलकर भगवान राम को 14 वर्षों के लिए वनवास भेज दिया था। मंथरा के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह कैकेयी को राजमाता बनाकर खुद दासियों में प्रमुख बनना चाहती थी।

जबकि सच यह है कि मंथरा भी भगवान राम से बहुत स्नेह करती थी और राम के वन जाने के बाद मंथरा को भी बहुत कष्ट हुआ था और जब राम वनवास के बाद लौटे तो मंथरा ने भगवान राम से क्षमा भी मांगी थी और कहा था उसे इतिहास हमेशा बुरा कहेगा। तब भगवान राम ने यह भेद खोला कि आप लोग जिस तरह से मुझसे स्नेह रखते थे ऐसे में जिस उद्देश्य से मैंने धरती पर जन्म लिया है वह पूरा नहीं हो पाता।

इसलिए देवी सरस्वती को आपकी जिह्वा पर बैठकर वह सब करवाना पड़ा जिससे मैं वन जाऊं और रावण का वध संभव हो। अगर आप माध्यम नहीं बनती तो मेरा धरती पर आना बेकार हो जाता है। अगर वास्तव में मंथरा खलनायक होती तो भगवान राम उसे भक्ति का वरादान नहीं देते और अगले जन्म में कृष्ण भक्ति से उनका उद्धार नहीं होता।

इस औरत ने किए ऐसे काम हो गई बदनाम

रामायण में एक स्त्री का नाम खलनायक तौर पर लिया जाता है। इस स्त्री का नाम है मंथरा। मंथरा पर यह आरोप लगाए जाते हैं कि इसने ही कैकेयी के मन में रावण के प्रति विष घोलकर भगवान राम को 14 वर्षों के लिए वनवास भेज दिया था। मंथरा के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह कैकेयी को राजमाता बनाकर खुद दासियों में प्रमुख बनना चाहती थी।

जबकि सच यह है कि मंथरा भी भगवान राम से बहुत स्नेह करती थी और राम के वन जाने के बाद मंथरा को भी बहुत कष्ट हुआ था और जब राम वनवास के बाद लौटे तो मंथरा ने भगवान राम से क्षमा भी मांगी थी और कहा था उसे इतिहास हमेशा बुरा कहेगा। तब भगवान राम ने यह भेद खोला कि आप लोग जिस तरह से मुझसे स्नेह रखते थे ऐसे में जिस उद्देश्य से मैंने धरती पर जन्म लिया है वह पूरा नहीं हो पाता।

इसलिए देवी सरस्वती को आपकी जिह्वा पर बैठकर वह सब करवाना पड़ा जिससे मैं वन जाऊं और रावण का वध संभव हो। अगर आप माध्यम नहीं बनती तो मेरा धरती पर आना बेकार हो जाता है। अगर वास्तव में मंथरा खलनायक होती तो भगवान राम उसे भक्ति का वरादान नहीं देते और अगले जन्म में कृष्ण भक्ति से उनका उद्धार नहीं होता।

मामा के रिश्ते को इसने किया बदनाम

महाभारत युद्ध के लिए कई लोगों को जिम्मेदार माना जाता है और उन्हें खलनायक के रूप में देखा जाता है। इनमें एक नाम शकुनी भी है। शकुनी गंधार का राजा था। लेकिन इसने अपना तमाम जीवन अपने बहन के सुसराल में बिता दिया।

शकुनी के ऊपर यह आरोप लगते हैं कि इसने अपने भांजे को गलत राह दिखाया और उनके मन में अपने चेचेरे भाइयों के प्रति नफरत की भावना भड़कायी जिससे दुर्योधन ने पूरे कुरूवंश को महाभारत के युद्ध में झोंक दिया और पूरे वंश का नाश हो गया।

लेकिन शकुनी हमेशा से दुष्ट विचारों वाला नहीं था। यह अपनी बहन गांधारी से बहुत स्नेह करता था और संसार के हर भाई की तरह यह भी चाहता था कि उसकी बहन की शादी एक योग्य व्यक्ति से हो और उसका जीवन हमेशा सुखमय रहे।

लेकिन जब गंगा पुत्र भीष्म गांधारी के विवाह के लिए अंधे धृतराष्ट्र के विवाह का प्रस्ताव लेकर आए तो शकुनि को भीष्म पर बहुत क्रोध आया।

शकुनी ने कहा कि पांडु के साथ गांधारी का विवाह प्रस्ताव लेकर आप क्यों नहीं आए जो हर तरह से योग्य है। शकुनि के लाख मना करने पर भी गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र के साथ हुआ और गांधारी ने आंखे होते हुए भी अपनी आंखों पर हमेशा के लिए पट्टी बांध ली।

भीष्म से बदला लेने के लिए शकुनि ने प्रतिज्ञा ली कि वह उस वंश का विनाश कर देगा जिस वंश ने उसके वंश की खुशियां छीनी है। अपनी इसी प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए शकुनी गांधार छोड़कर बहन के ससुराल हस्तिनापुर आकर रहने लगा। महाभारत युद्ध करवाकर इसने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।
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दोस्ती ने जिसे बना दिया खलनायक

दोस्ती की जब भी बात होती है तब सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता के साथ दुर्योधन और कर्ण की मित्रता की भी मिसाल दी जाती है। यही मित्रता कर्ण के लिए अभिशाप बन गया जिसने उसे इतिहास में खलनायक की पंक्तियों में लाकर खड़ा कर दिया।

कर्ण पर इल्जाम यह लगता है कि इसने दुर्योधन को कभी इस बात के लिए नहीं समझाया कि चेचेरे भाइयों से मित्रता करके युद्ध की संभावना को टाल सकते हैं। बल्कि इसने हमेशा दुर्योधन के अभिमान और महत्वाकांक्षा में आग में घी डालने का काम किया।

दुर्योधन के साथ मिलकर कर्ण ने भी द्रौपदी का भरी सभा में अपमान किया था। अभिमन्यु वध में कर्ण ने भी मर्यादा का पालन नहीं किया था और निहत्थे अभिमन्यु पर पीछे से वार किया था।

लेकिन कर्ण के खलनायक बनने के पीछे की कहानी पर गौर करें तो पाएंगे कि कर्ण कहीं न कहीं हालात का मारा था जिसने उसे खलनायक बना दिया।

पैदा होते ही कर्ण की मां ने उसे गंगा में बहा दिया। राजकुमार होते हुए भी यह अनाथों की तरह पला। अर्जुन के समान वीर होते हुए भी अर्जुन से कमतर होने का ताना मिलता रहा। हालात के हाथों में मजबूर कर्ण को जब दुर्योधन ने सहारा दिया और सम्मान दिलाया तो कर्ण दुर्योधन का आभारी हो गया और भला बुरा जानते हुए भी दुर्योधन का हर हाल में साथ देना अपना कर्तव्य बना लिया। इसी कर्तव्य और आभार के बोझ ने कर्ण को नायक के गुण होते हुए भी खलनायक बना दिया।
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