वैशाख मास हिंदू पंचांग के अनुसार अत्यंत पुण्यदायक और मोक्षदायक माना गया है। यह महीना विशेष रूप से दान, स्नान और जप-तप के लिए उत्तम होता है। शास्त्रों पुराणों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा कहा गया है कि इस महीने में किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। पद्म पुराण में कहा गया है-
"मासानां चैव सर्वेषां वैशाखः परमः स्मृतः।
पुण्येनानेन तुल्यं हि नास्ति किञ्चित् सुरेश्वर।।"
अर्थात सभी महीनों में वैशाख मास को सर्वोत्तम माना गया है। इस मास में किया गया पुण्य अन्य किसी मास के पुण्य के बराबर नहीं होता। मान्यता है कि वैशाख में सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान करना तथा विभिन्न प्रकार के दान करने से व्यक्ति समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
1. जल दान
महत्व: जल का दान वैशाख में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। स्कंद पुराण में कहा गया है "वैशाखे दत्तं जलं शीतलं, स्वर्गदं भवति न संशयः।"
फल: प्यासे को जल पिलाने या जल से भरा घट दान करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं, पितरों को तृप्ति मिलती है और आत्मा को शांति मिलती है।
2. सत्तू का दान
महत्व: वैशाख में ठंडी और सुपाच्य चीजों का दान करने की परंपरा है, और सत्तू इसमें सबसे उत्तम है।
फल: सत्तू का दान करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है, भूखों को भोजन मिलने का पुण्य प्राप्त होता है और घर में अन्न-समृद्धि बनी रहती है।
3. वस्त्र दान
महत्व: गर्मी के इस मौसम में जरूरतमंदों को हल्के और सफेद वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यदायक होता है।
फल: इससे पापों का क्षय होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और अग्नि तथा सूर्य दोष शांत होते हैं।
4. छाता और चप्पल का दान
महत्व: तपते सूरज की गर्मी से बचाव के लिए छाता, चप्पल या टोपी का दान बहुत फलदायक माना गया है।
फल: यह दान व्यक्ति को दीर्घायु, प्रतिष्ठा और गर्मी से राहत प्रदान करता है। इससे राहु-केतु का दोष भी शांत होता है।
5. गुड़ और शक्कर का दान
महत्व: मिठास का प्रतीक यह दान वैशाख में विशेष रूप से मीठा जल, शरबत या गुड़ देने के रूप में किया जाता है।
फल: इससे वाणी में मधुरता आती है, पारिवारिक जीवन सुखद बनता है और शुक्र व बुध ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
6. तांबे के पात्र का दान
महत्व: तांबे के लोटे या कलश का दान विशेष रूप से जल भरकर करना श्रेष्ठ माना गया है।
फल: यह सूर्यदेव की कृपा दिलाता है, आत्मिक शुद्धि लाता है और पितृ दोष की शांति करता है।
7. फल और बेल का दान
महत्व: बेल (बिल्व फल ) का दान शिव पूजन में विशेष फलदायी होता है और ताजे फलों का दान स्वास्थ्यवर्धक माना गया है।
फल: इससे रोगों से मुक्ति, घर में सुख-शांति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।