स्कन्द पुराण में वैशाख मास को पुण्यार्जन माह की संज्ञा देते हुए 'माधव' मास कहा गया है।
सभी प्राणियों के जीवन में उनके द्वारा किये गये शुभा-शुभ कर्मों के परिणामस्वरूप जन्म ले रही कठिनाइयों से मुक्ति पाने का साधन वैशाख 28 अप्रैल से आरम्भ हो रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह मास पूर्णतः बृहस्पति एवं शनि के प्रभाव में रहता है वे ही इस माह में शुभ-अशुभ कर्मो के दृष्टा भी हैं। भ्रमणकाल की अवधि में चंद्रमा प्रत्येक वर्ष पूर्णिमा के ही दिन विशाखा एवं अनुराधा नक्षत्र पर अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होते हैं। बृहस्पति ज्ञान और धर्म का उपदेश देने वाले और शनिदेव न्याय तथा सेवाभाव के ग्रह कहे गए हैं। इसीलिए इस माह को परोपकार का माह भी कहा गया है। वैशाख माह में प्याऊ लगाना, जीवों की रक्षा करना, निर्धनों की मदद करना, भीषण गर्मी से प्यासे पशु-पक्षियों को पानी पिलाकर उनके जीवन की रक्षा करना परम शुभकृत्य है जिससे हमें गुरु एवं शनि की कृपा प्राप्त होती है।
स्कन्द पुराण में वैशाख मास को पुण्यार्जन माह की संज्ञा देते हुए 'माधव' मास कहा गया है। 'न माधवसमा मासो न कृतेन युगं समम्। न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।। अर्थात बैशाख के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगा के समान कोई तीर्थ नही है। देवर्षि नारद ने भी बैशाख माह का महत्व बताते हुए कहा है कि जिस प्रकार विद्याओं में 'वेद' श्रेष्ठ है, मंत्रों में 'प्रणव', वृक्षों में कल्पवृक्ष, धेनुओं में कामधेनु, देवताओं में विष्णु, वर्णों में ब्राह्मण, वस्तुओं में प्राण, नदियों में गंगा, तेजों में सूर्य, अस्त्र-शस्त्रों में चक्र, धातुओं में स्वर्ण, तथा रत्नों में कौस्तुभमणि श्रेष्ठ है, उसी तरह महीनों में वैशाख मास सर्वोत्तम है।
जो व्यक्ति भूख, प्यास से व्याकुल जीवों की मदद करता है उसकी सेवा नारायण की सेवा करने जैसा है। इस माह के शुक्लपक्ष की तृतीया को 'अक्षय तृतीया' कहा गया है। इस दिन किये सभी शुभ-अशुभ कर्मों का फल अक्षुण तो रहता है। इसी दिन त्रेतायुग का आरम्भ, भगवान विष्णु नर-नारायण, परशुराम, नृसिंह और ह्ययग्रीव अवतार हुए। सप्तमी को गंगा एवं नवमी को सीता का प्राकट्यपर्व मनाया जाता है। अमावस्या को देववृक्ष 'वट' की पूजा की जाती है तो पूर्णिमा को विश्वभर में परोपकार, सादगी और करुणा का सन्देश देने वाले गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वैशाख मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया को जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा भी निकलती है। सनातन धर्म के चार धाम में से एक 'बद्रीनाथधाम' के कपाट वैशाख माह की अक्षय तृतीया को खुलते हैं। इसलिए वैशाख माह का एक-एक दिन महत्वपूर्ण है जन-मानस को इसका लाभ उठा चाहिए।