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महावीर जयंती आज: जैन धर्म में भोजन के नियम, जिनको अपनाकर आप रह सकते हैं बीमारियों से कोसो दूर

Sun, 25 Apr 2021 10:50 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली

सार

  • जैन धर्म में तो रात्रि भोजन करने की साफ़-साफ़ मनाही है,क्योंकि जैन धर्म अहिंसा पर जोर देता है फिर चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो।
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हैप्पी महावीर जयंती 2021 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज भगवान महावीर की जयंती है। जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के सिद्धांतों को 'जियो और जीने दो' का आधार माना जाता है। भारत में आहार ही औषधि है, जो शक्तिप्रद, वीर्यप्रद और बुद्धि के विकास में सहायक है। संयम हमारे भोजन, वस्त्र, मन, वाणी और इंद्रियों में होना चाहिए। कोरोना महामारी के भयाभय परिणामों को देखते हुए अब इससे सबक लेने की जरूरत है।अब हमें अपने भीतर की संवेदना और संयम को जगाने की आवश्यकता है। जैन धर्म में भी अनेक परंपराओं का पालन किया जाता है। इनमें से एक परंपरा ये भी है सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए यानी रात में खाना खाने से बचना चाहिए। सूर्यास्त के बाद भोजन न करने के पीछे अहिंसा और स्वास्थ्य दो प्रमुख कारण है, जो इस प्रकार है-

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पहला कारण अहिंसा
यदि आयुर्वेद की मानें तो हमें सूर्यास्त से पूर्व भोजन कर लेना चाहिए। जैन धर्म में तो रात्रि भोजन करने की साफ़-साफ़ मनाही है,क्योंकि जैन धर्म अहिंसा पर जोर देता है फिर चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। वैज्ञानिक शोधों से भी स्पष्ट हो चुका है कि कीटाणु और रोगाणु जिन्हें हम सीधे तौर पर देख नहीं सकते वे सूक्ष्म जीव रात्रि में तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे में सूर्यास्त के बाद खाना बनाने और खाने से ये भोजन में प्रवेश कर जाते हैं। खाना खाने पर ये जीव पेट में चले जाते हैं और बीमारियों का कारण बनते हैं। वहीं जैन धर्म में इसे हिंसा माना गया है इसलिए रात्रि भोजन को जैन धर्म एवं आयुर्वेद में निषेध बताया गया है।

दूसरा कारण सेहत
सूर्यास्त से पहले भोजन करने से पाचन तंत्र ठीक रहता है। क्योंकि रात्रि में हमारी पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है इसके आलावा जल्दी भोजन करने से सोने से पूर्व भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है जिससे गैस,एसिडिटी एवं पेट में भारीपन आदि जैसे समस्याओं से बचा जा सकता है। यह भी माना जाता है कि हमारा पाचन तंत्र कमल के समान होता है जिसकी तुलना ब्रह्म कमल से की गई है। प्रकृति का नियम है कि सूर्य उदय के साथ कमल खिलता है और अस्त होने के साथ बंद हो जाता है। इसी तरह पाचन तंत्र भी सूर्य की रोशनी में सुचारु रूप से कार्य करता है और अस्त होने पर मंद पड़ जाता है। यदि हम रात्रि में भोजन करेंगे तो जितनी ऊर्जा भोजन से मिलनी चाहिए वह नहीं मिलेगी और हमारा खाया हुआ खाना नष्ट हो जाएगा,जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी।

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