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Tulsi Vivah 2024 Date: तुलसी विवाह कब है? जानें सही तिथि, पूजा विधि और महत्व

Thu, 24 Oct 2024 01:28 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सनातन धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस साल तुलसी विवाह किस दिन किया जाएगा और इसका महत्व क्या है।
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तुलसी विवाह कब है? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Tulsi Vivah 2024: सनातन धर्म में तुलसी को स्वयं देवी महालक्ष्मी का अवतार माना जाता है और इनकी पूजा-अर्चना की जाती है। तुलसी को दूसरे नाम विष्णुप्रिय से भी जाना जाता है। हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि से एक दिन पूर्व को प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। कुछ स्थानों पर यह पांच दिनों की अवधि के लिए मनाया जाता है, जो कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है। पूरे भारत में तुलसी विवाह विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति और परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए किया जाता है।  

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पौराणिक मान्यताओं को अनुसार इससे एक दिन पहले देवउठनी एकादशी पर श्रीहरि विष्णु चार महीने बाद क्षीर निद्रा से जागते हैं। सनातन धर्म में इसके बाद ही सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के दिन से कई जगह शादी की शहनाईयां बजनी शुरू हो जाती हैं। आइए जानते हैं इस साल तुलसी विवाह किस दिन किया जा रहा है और इसका महत्व क्या है।

तुलसी विवाह 2024 कब है?
तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का प्रारम्भ 12 नवम्बर 2024 को शाम 4:04 बजे हो रहा है और इसका समापन 13 नवम्बर 2024 को दोपहर 1:01 बजे होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार तुलसी विवाह 13 नवंबर 2024 को किया जाएगा। इससे एक दिन पहले 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है, इस दिन चातुर्मास की समाप्ति होगी और कई जगहों पर इसी दिन भगवान विष्णु का शालिग्राम के रूप में तुलसी जी के साथ विवाह करवाने की परंपरा है।
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कैसे किया जाता है तुलसी विवाह? 
इस दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर शंख और घंटानाद सहित मंत्र बोलते हुए भगवान विष्णु को जगाया जाता है। इसके बाद उनकी पूजा की जाती है। इस दिन शाम के समय घरों और मंदिरों में दीये जलाए जाते हैं और गोधूलि वेला (सूर्यास्त के समय) भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह करवाया जाता है।

तुलसी विवाह का महत्व 
तुलसी विवाह करने से वैवाहिक जीवन में समस्याएं नहीं आती हैं। यदि किसी के विवाह में देरी हो रही हैं, तो भी तुलसी विवाह से जल्द विवाह के योग बनते हैं। साथ ही निसंतान लोगों को संतान की प्राप्ति होती हैं और घर परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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