फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tulsi Vivah 2022: तुलसी विवाह कब है? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Sun, 16 Oct 2022 07:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 4
तुलसी विवाह - फोटो : amar ujala
Tulsi Vivah 2022: हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को इस विवाह का आयोजन किया जाता है।  इस तिथि से एक दिन पूर्व को प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। कुछ स्थानों पर यह पांच दिनों की अवधि के लिए मनाया जाता है, जो कार्तिक महीने की पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है। तुलसी विवाह पूरे भारत में विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति और परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए की जाती है। हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को पवित्र पौधा माना जाता है और उसे माता के स्वरूप में पूजा जाता है। तुलसी को स्वयं देवी महालक्ष्मी का अवतार माना जाता है, जो पहले 'वृंदा' के रूप में पैदा हुई थीं। युवतियां वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिए पूरी श्रद्धा के साथ देवी लक्ष्मी से प्रार्थना करती हैं। तुलसी विवाह की रस्में युवा, अविवाहित महिलाओं द्वारा भी अच्छे पति पाने के लिए की जाती हैं। मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु 4 महीने की लंबी नींद के बाद जागते हैं। उनके जागने के साथ ही सभी शुभ मुहूर्त खुल जाते हैं। इसी दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम अवतार के साथ माता तुलसी का विवाह करने की परंपरा भी है। और इसी दिन से विवाह एवं अन्य सभी मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। आइए जानते हैं तुलसी विवाह की तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि। 
Dhanteras 2022 Date: इस साल धनतेरस कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और विधि
विज्ञापन

2 of 4
राधाकुंड में तुलसी-सालिग्राम का विवाह - फोटो : Amar Ujala
तुलसी विवाह 2022 का शुभ मुहूर्त
तुलसी विवाह 2022: शनिवार 5 नवंबर 2022
कार्तिक द्वादशी तिथि आरंभ: 5 नवंबर 2022, शनिवार, सायं 6:08 बजे
द्वादशी तिथि समाप्त: 6 नवंबर 2022 , रविवार, सायं 5:06 बजे
तुलसी विवाह पारण मुहूर्त: 6 नवंबर को, रविवार,  दोपहर 1:09 से 03:18 तक
विज्ञापन

3 of 4
तुलसी विवाह का महत्व  - फोटो : अमर उजाला
तुलसी विवाह का महत्व 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी और भगवान शालिग्राम की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। उनके विवाहिक जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। साथ ही पति-पत्नी के बीच उत्पन्न हो रहे समस्याओं का भी समाधान निकलता है।

Bhai Dooj 2022: कब है भाई दूज, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और तिलक लगाने की विधि
विज्ञापन

4 of 4
तुलसी विवाह की पूजा विधि   - फोटो : file photo
तुलसी विवाह की पूजा विधि  
  • सबसे पहले चौकी पर तुलसी का पौधा स्थापित करें और दूसरी और उसी चौकी पर शालिग्राम रखें। 
  • इनके बगल में एक जल भरा कलश रखें। 
  • घी का दीपक जलाएं तुलसी और शालिग्राम पर गंगाजल छिड़कें। 
  • रोली ,चंदन का टीका लगाएं। 
  • तुलसी के गमले में गन्ने का मंडप जरूर बनाएं। 
  • अब तुलसी मां को सुहाग का प्रतीक लाल चुनरी, चूड़ी आदि चढ़ाएं। 
  • कुछ लोग श्रृंगार का पूरा सामान तुलसी जी को अर्पित करते हैं। 
  • इसके बाद शालिग्राम को हाथ में लेकर परिक्रमा करें और इसके बाद आरती करें। 
  • तुलसी विवाह संपन्न होने के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें। 
  • कहते हैं कि तुलसी विवाह करने का फल कन्यादान करने के बराबर प्राप्त होता है। 
  • व्यक्ति के जीवन की परेशानियां और कष्ट दूर होते हैं साथ ही वैवाहिक जीवन भी अच्छा रहता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें