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Surya Stuti: जीवन में चाहिए सुख और समृद्धि तो रविवार के दिन करें इस स्तुति का पाठ

Sat, 27 Jan 2024 05:50 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सूर्य देव की पूजा के दौरान साधक को सूर्य मंत्रों का जाप करना चाहिए और सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं।
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रविवार के दिन करें इस स्तुति का पाठ
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विस्तार
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Ravivar Surya dev puja: सनातन धर्म में रविवार के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आती है। सूर्य देव की पूजा के दौरान साधक को सूर्य मंत्रों का जाप करना चाहिए और सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। ध्यान दें कि इस स्तोत्र को सुबह के समय पढ़ें परिणाम उत्तम होंगे। श्री सूर्य स्तुति इस प्रकार है-

। श्री सूर्य स्तुति ।।

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जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन ।।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।।

सूर्य स्तुति के लाभ 
  • मानसिक तनाव को दूरकर मानसिक बल और मन को शांति के लिए सूर्य स्तुति प्रभावकारी मानी जाती है। 
  • शरीर में सकारात्मकता का संचार करने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए सूर्य स्तुति लाभकारी होती है। 
  • शारीरिक कष्टों से मुक्ति पाने और नव ग्रह शांति के लिए सूर्य स्तुति प्रभावकारी होती है।
  • मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए सूर्य स्तुति का पाठ करना चाहिए। 
भगवान सूर्य के मंत्र
सूर्य स्तुति के साथ सूर्यदेव के इन मंत्रों का भी जाप अवश्य करें 
  •  ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।
  • ॐ सूर्याय नम: ।
  • ॐ घृणि सूर्याय नम: ।
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