देवी मां को फल, फूल, सिंदूर सभी काफी प्रिय होता है। भक्त जब अपनी मुरादें लेकर मां के दरवाजे पर आते हैं तो यही उन्हें चढ़ाते हैं। लेकिन वाराणसी के घाट पर स्थित देवी मां के इस मंदिर में भक्त मां को ताला और चाभी चढ़ा कर खुश करते हैं।
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर मां बंदी देवी का मंदिर है। कहते हैं जो भी यहां अपनी मुरादें लेकर आता है, मां झट से उसे पूरी कर देती हैं। यहां पूरे साल भक्तों की भारी भीड़ रहती है। लोगों की आस्था है कि ताले-चाभी से मां प्रसन्न होती हैं। जो यहां आकर ताले और चाभी मां को चढ़ाता है, मां उसकी झोली खुशियों से भर देती हैं।
मां के इस मंदिर की कहानी भी बड़ी रोचक है। उन्हें पाताल की देवी माना जाता है लेकिन भगवान विष्णु की आज्ञा से उन्होंने यहां वास किया था। कहते हैं कि मां ने अहिरावण के जेल से भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्ति दिलाई थी, जिसके कारण से मंदिर को बंदी देवी मंदिर कहा जाता है। इसलिए लोगों का यह भी कहना है कि जिनका कोर्ट में केस चल रहा हो, वो यहां आकर अगर मां को चढ़ावा चढ़ाते हैं, तो उन्हें केस में जीत हासिल होती है।