ईश्वर ने दिन और रात बनाकर यह भी निर्धारित कर दिया है कि दिन के समय सूर्य देव होंगे तो रात के समय चंद्रमा। इसी तरह संसार के कार्यों का भी विभाजन किया है।
कुछ काम भगवान ने दिन के लिए बनाए हैं तो कुछ काम रात के लिए। जैसे रात का समय है स्वाध्याय और सोने के लिए जबकि दिन का समय है काम करने के लिए।
शास्त्रों में कहा गया है कि 'दिवास्वापं च वर्जयेत्' जो व्यक्ति प्रकृति के नियम के विरुद्घ जाकर दिन के समय सोता है उससे लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
आयुर्वेद में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति दिन के समय सोता है उसे कई प्रकार के रोग घेर लेते हैं। ऐसे व्यक्ति की आयु क्षीण हो जाती है।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि मनुष्य को काम वासना पर नियंत्रण रखकर समागम से बचना चाहिए। जो व्यक्ति दिन के समय समागम करता है उसकी उम्र कम होती है। मृत्यु के बाद यम की यातना भी सहनी पड़ती है।