shattila ekadashi 2025 muhurat
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तिल दान का महत्व
मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न तिल और माता लक्ष्मी के प्रिय फल गन्ने के रस से बने गुड़ के मिष्ठान बनाकर दान करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को जल का घड़ा, तिल, छाता, जूता और गरम वस्त्र दान करें। दान करते समय प्रार्थना करें, “इस दान के द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मुझ पर प्रसन्न हों।” तिल से बने व्यंजन या तिल से भरा पात्र दान करने से अंनत पुण्यों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, उन तिलों के बोने पर उनसे जितनी शाखाएं उत्पन्न होती हैं, उतने हजार वर्षों तक दान करने वाला भक्त स्वर्ग लोक में रहता है। इस दिन तिल मिश्रित जल से स्नान करें, तिल से होम करें, तिल का उबटन लगाएं, तिल मिश्रित जल पीएं, तिल का दान करें और तिल से बना भोजन करें। इस प्रकार छह कामों में तिल का उपयोग करने के कारण यह एकादशी ‘षट्तिला’ कहलाती है, जो भक्त को तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप से दूर रखती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।