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कब है शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि, जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व

Mon, 12 Oct 2026 07:33 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अष्टमी-नवमी तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। इस तिथि पर छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा होती है।
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Shardiya Navratri 2026 - फोटो : अमर उजाला AI
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विस्तार
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शारदीय नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि पर देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-आराधना होती है और अष्टमी-नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर देवी के आठवें स्वरूप मां महागौरी और नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। अष्टमी-नवमी तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ और कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। इस तिथि पर छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा होती है। आइए जानते हैं अष्टमी और नवमी तिथि कब मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इन तिथियों का क्या है धार्मिक महत्व। 
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शारदीय नवरात्रि अष्टमी तिथि 2026 
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से आरंभ हो रही है और इसका समापन 19 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को मनाई जा रही है। अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का समय 19 अक्तूबर को सुबह 08 बजकर 29 मिनट से लेकर 10 बजकर 16 मिनट तक कर सकते हैं। 

शारदीय नवरात्रि नवमी तिथि 2026
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 19 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट से शुरू हो रही है, जिसका समापन 20 अक्तूबर को 12 बजकर 50 मिनट पर होगा। ऐसे में शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 19 अक्तूबर को मनाई जाएगी। नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन करने का विशेष महत्व होता है। 19 अक्तूबर को कन्या पूजन के लिए मुहूर्त अभिजीत रहेगा। इसका समय 11 बजकर 43 मिनट से लेकर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
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नवरात्रि अष्टमी और नवमी तिथि का महत्व
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। अष्टमी-नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन करने का विशेष महत्व होता है। अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-आराधना होती है, जबकि नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की आराधना करने का विधान होता है। इस दिन मां के इस स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-समृद्धि,खुशहाली और परिवार में समृद्धि का वास होता है। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन करने की विशेष परंपरा होती है। इस दिन 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की कन्याओं की पूजा, भोजन, दक्षिणा देते हुए उनका आशीर्वाद लिया जाता है। अष्टमी-नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन से सुख-शांति और सकारात्मकता आती है। 

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