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Navratri 2024: कन्या पूजन के लिए नहीं मिल रहीं कन्याएं? इस तरह करें माता को प्रसन्न

Thu, 10 Oct 2024 11:31 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का विधान है। कन्या पूजन के लिए 9 कन्याओं को घर में आमंत्रित किया जाता है, लेकिन अगर आपको लड़कियां ना मिले तो परेशान न हों। आइए जानते हैं माता रानी को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।
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kanya pujan 2024 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Shardiya Navratri 2024 Kanya Pujan: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के 9 रूपों की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है।  नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ इस पावन पर्व का समापन होता है। माना जाता है कि नवरात्रि के दिनों में भगवती मां दुर्गा पूरे नौ दिन तक धरती पर रहती हैं और भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का विधान है। इस दिन कन्या पूजन करने से माता रानी प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं। कन्या पूजन के लिए 9 कन्याओं को घर में आमंत्रित किया जाता है, लेकिन अगर आपको लड़कियां ना मिले तो परेशान न हों। आइए जानते हैं माता रानी को कैसे प्रसन्न कर सकते हैं।

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कन्याएं न मिले तो क्या करें?
  • अगर कन्या पूजन के लिए आस-पड़ोस में कोई कन्या न हो तो आप मंदिर या ऐसी किसी स्थान पर जा सकते हैं, जहां जरूरतमंद या गरीबों लोग और बच्चे मिल जाएं। ऐसे स्थानों पर जाकर आप लड़कियों को भोजन कराएं और दान दें। इस तरह आप कन्या पूजन संपन्न  कर सकते हैं।
  • कई बार लोग किसी कारण वश दूसरों के घर अपनी बच्चियों को नहीं भेज पाते। ऐसे में आप चाहें, तो कन्याओं के लिए उनके घर पर ही प्रसाद और दक्षिणा आदि भेज सकते हैं। इस तरह भी पूजा संपन्न मानी जाती है।
  • इसके अलावा आप घर की स्त्रियों की भी पूजा कर सकते हैं। सनातन धर्म में स्त्रियों को देवी का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में आप घर की स्त्रियों की भी कन्या की तरह पूजा कर सकते हैं।

कन्या पूजन की विधि
  • अष्टमी-नवमी के दिन कन्याओं को अपने घर पूजन के लिए आमंत्रित करें। इन कन्याओं की आयु 2 वर्ष से 10 वर्ष के बीच ही होनी चाहिए। कन्याओं के घर आने पर उनका स्वागत फूल-माला से करें।
  • इसके बाद कन्याओं को बैठने के लिए आसन बिछाएं। इसके बाद कन्याओं के पैर धोएं, फिर चावल, फूल, रोली आदि से उनकी पूजा करें। इसके बाद उन्हें लाल रंग की चुनरी पहनाएं। कन्याओं को भोजन में पूड़ी, हलवा, काले चने, खीर, नारियल और फल आदि दें। जब वे भोजन खा लें तो उन्हें पानी पिलाएं।
  • इसके बाद उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार उपहार या दक्षिणा दें। इसके बाद उनके पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण देकर ही विदा करें।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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