श्रावण मास अर्थात सावन का महीना भगवान शंकर को प्रसन्न करने और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने का महोत्सव है। यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इसी मास में जगत जननी देवी पार्वती ने कठोर तपस्या एवं व्रत करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें पति रूप में प्राप्त किया। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार सावन के महीने में शिवजी ने समुद्र मंथन से निकला विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। इसी कारण इस महीने में शिव पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष सावन के महीने की शुरूआत 04 जुलाई से होने जा रही है। अधिकमास के चलते सावन का महीना 59 दिनों तक रहेगा जो 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा।
श्रीलिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्रीविष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणवसंज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं। लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं,वे (सत,रज,तम) तीनों गुणों से तथा त्रिदेवों युक्त रहती हैं। जो प्राणी उस वेदी के साथ लिंग की पूजा करता है वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है। इस माह में व्रत करने से वात और पित्त भी कुपित नहीं होते, त्रिदोष भी सम हो जाते हैं।
सावन सोमवार का महत्व
सावन में सोमवार का व्रत करने से पूरे परिवार को सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। जिनको क्रोध अधिक आता हो, तनाव में रहते हों, मानसिक रोग हों और स्वास्थ्य से भी कमज़ोर हों उन्हें इस समय शिव आराधना शुभ फलदायक होती है। धार्मिक मान्यता यह है कि इस मास में प्रातः जल्दी उठकर स्नान के बाद भक्ति भाव और विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन एवं अभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं,उन्हें किसी तरह का कोई भय नहीं रहता। विवाहित महिलाओं को अपने सौभाग्य में वृद्धि के लिए तथा अविवाहित कन्याओं को शीघ्र विवाह तथा गुणवान पति पाने की अभिलाषा के साथ इस माह में व्रत रखना तथा भगवान शिव का अभिषेक करना विशेष रूप से लाभदायक होता है।
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कामनानुसार करें अभिषेक
शिव पुराण में बताया गया है कि शिव को अर्पित किए जाने वाले द्रव्यों के लाभ भी अलग-अलग होते हैं। विवाह की इच्छा रखने वालों को दूध, बेलपत्र,गंगाजल,शमीपत्र,नारियल पानी,भांग,खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
जल से अभिषेक करने पर सुख-सौभाग्य में वृद्धि, दूध से उत्तम संतान की प्राप्ति, गन्ने के रस से यश, शहद से कर्जमुक्ति, कुश के जल से रोगमुक्ति, पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार चन्दन मिश्रित जल चढाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है। भांग चढाने से बुराइयां और मन के विकार दूर होते हैं। कुशाग्र बुद्धि के लिए विद्यार्थियों को शर्करा मिश्रित दुग्ध की धारा चढ़ानी चाहिए। गंगाजल से अभिषेक करने पर भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
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