shivling
दैत्यराज दंभ की कोई संतान नहीं थी उसने संतान प्राप्ति के लिए विष्णु जी की कठिन तपस्या की। दंभ की तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने उससे वरदान मांगने को कहा, तब दंभ ने ऐसे पुत्र का वरदान मांगा जो तीनों लोकों के लिए अजेय और महापराक्रमी हो। भगवान श्रीहरि के वरदान से दंभ के यहां एक पुत्र ने जन्म लिया, जिसका नाम शंखचूड़ था। शंखचूड़ ने ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव प्रकट हुए और वर मांगने के लिए कहा। तब शंखचूड़ ने कहा कि मुझे वरदान दीजिए कि मैं देवताओं के लिए अजेय हो जाऊं। तब ब्रह्माजी ने उसे श्रीकृष्णकवच दिया।