सावन का पवित्र महीना चल रहा है। सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। भगवान शिव को सावन का महीना बहुत ही प्रिय होता है। सावन के महीने में भगवान शिव ने माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर पति रूप में उनका प्रस्ताव स्वीकार्य किया था। एक मान्यता यह भी है कि सावन के महीने में ही समुद्रमंथन हुआ था। समुद्र मंथन में कई दिव्य वस्तुओं के साथ विष भी निकला था, जिसे भगवान शंकर ने अपने कंठ में रखकर इस संपूर्ण सृष्टि को विनाश से बचाया। सावन के महीने में सोमवार के दिन विशेष रूप से भगवान शिव का अलग-अलग सामग्रियों से जलाभिषेक किया जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना करने पर भक्तों की सभी तरह की मनोकामना जरूर पूरी होती है। सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन जरूर करना चाहिए। आइए दर्शन करते हैं भगवान भोले भण्डारी की कुछ शानदार तस्वीरें...
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sawan 2020
सावन सोमवार की तारीखें-
पहला सोमवार- 6 जुलाई 2020
दूसरा सोमवार- 13 जुलाई 2020
तीसरा सोमवार- 20 जुलाई 2020
चौथा सोमवार- 27 जुलाई 2020
पांचवां सोमवार- 03 अगस्त 2020
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sawan 2020
सावन के महीने में भगवान भोले को जल की धारा बहुत ही प्रिय होती है। सुख शांति के लिए जलधारा शुभकारक बताई गई है।
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sawan 2020
भगवान शिव को श्रद्धा पूर्वक कुश के जल की धारा चढ़ाने से रोगी व्यक्ति को रोगमुक्ति मिलती है।
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sawan 2020
चन्दन मिश्रित जल भोलेनाथ पर चढाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है।
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sawan 2020
सावन के महीने में पंचाक्षर मंत्र और महामृत्युंजय जाप करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है।
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सत्य के शिव
अर्धनारीश्वर भी... काम के विजेता भी...
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सत्य के शिव
जहरीले सांपों का आभूषण भी... माथे पर शीतल चंद्रमा भी...
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सत्य के शिव
साकार भी... निराकार भी... उसी रूप में विवाह, जिसमें वे हमेशा रहते हैं। जहां अन्य देवताओं के शरीर पर सुंदर आभूषण, भोले भंडारी ने भभूत को पूरे शरीर में लपेटे रखा...मर्यादा तोड़ने पर दंड... बेकाबू होने पर भस्म करने वाले देव...
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सत्य के शिव
गृहस्थ होने के साथ... विरक्त भी...
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सत्य के शिव
वंचितों को अपनाने वाले एक मात्र देवता... पशुओं के रक्षक पशुपति...
श्मशान में कोई नहीं रुकता... भोले भंडारी का ठिकाना मरघट भी...
जहां कोई नहीं रह सकता (कैलाश)... वहां शिव ने धूनी लगाई...
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सत्य के शिव
- फोटो : shiv temple
उग्र होकर ताडंव करने वाले भी... सौम्यता से भरे भोले भंडारी भी...अधनंगे, मतवाले, नाचते-गाते, नशा करते भगवान शंकर भोले भंडारी भी...परम क्रोधी भी, दयासिंधु भी...
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सत्य के शिव
देवताओं और असुरों, दोनों के पूजनीय देव महादेव... उत्सव में भी शिव आराधना, शोक, मृत्यु और अभाव में भी शिव साधना...शिव का नृत्य श्मशान में भी, उत्सव में भी...
उत्तर में कैलाश, दक्षिण में रामेश्वरम् दोनों जगहों में एक जैसे पूजनीय...भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम, श्रीकृष्ण उन्मुक्त जबकि शिव असीमित व्यक्तित्व के स्वामी...आदि भी और अंत भी... सभी देव जबकि शिव महादेव...