रक्षाबंधन न केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और मंगलकामना का पवित्र अवसर है। कई बार परिस्थितियों के कारण भाई बहन के पास नहीं आ पाता। ऐसे में बहन घर पर रहकर भी धार्मिक विधि से भाई के लिए मंगलकामना कर सकती है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और संकल्प ईश्वर तक अवश्य पहुंचता है।
भाई दूर हो तो नारियल बनेगा प्रतीक
यदि भाई रक्षाबंधन के दिन आपके पास नहीं है तो बहन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करे। संभव हो तो इस दिन कुछ समय निर्जला रहकर अपने भाई की कुशलता और दीर्घायु के लिए संकल्प लें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें और एक साबुत नारियल लें। नारियल को भाई का प्रतीक मानकर उसे स्वच्छ जल से पोंछकर तिलक करें। इसके बाद नारियल पर कलावा बांधें और मन में अपने भाई का ध्यान करते हुए उसे पूजा स्थान पर भगवान के सामने रख दें।
मन से करें भाई की मंगलकामना
नारियल को पूजा घर में रखने के बाद दीपक जलाएं और भगवान गणेश, अपने इष्टदेव तथा भगवान विष्णु से भाई के सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और जीवन में आने वाली परेशानियों से रक्षा की प्रार्थना करें। बहन अपने भाई का नाम लेकर मन ही मन संकल्प कर सकती है कि जिस प्रकार वह प्रत्यक्ष रूप से भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र नहीं बांध पा रही है, उसी प्रकार यह नारियल उसके स्नेह और मंगलकामना का प्रतीक है। इसके बाद भाई की सुख-समृद्धि और हर संकट से रक्षा के लिए प्रार्थना करें।
राखी न बांध पाएं तो भावना बनी रहे
रक्षाबंधन की सबसे बड़ी शक्ति बहन की भावना और भाई के प्रति उसका प्रेम है। भाई सामने न हो तो बहन राखी को भगवान के चरणों में अर्पित कर सकती है और मन में भाई की कलाई पर राखी बांधने का भाव रख सकती है। इसके बाद नारियल पर बांधा गया कलावा भाई के प्रति रक्षा-संकल्प का प्रतीक माना जा सकता है। पूजा के दौरान बहन यह भावना रखे कि भगवान उसके भाई की हर परिस्थिति में रक्षा करें और उसे सुखी, स्वस्थ और प्रसन्न रखें।
प्रार्थना के बाद करें भोजन
पूजा और प्रार्थना पूरी करने के बाद बहन अपने भाई को मन ही मन राखी बांधने का भाव रखते हुए भगवान का आशीर्वाद ले। इसके बाद ही अपना व्रत या निर्जला संकल्प पूरा करके भोजन करे। यदि स्वास्थ्य की दृष्टि से निर्जला रहना संभव न हो तो स्वयं को कष्ट देने के बजाय फल या जल ग्रहण करते हुए श्रद्धा से पूजा करना उचित है। रक्षाबंधन का सार बाहरी विधि से अधिक भाई के प्रति बहन के निर्मल प्रेम, स्नेह और उसके मंगल जीवन की सच्ची कामना में निहित है।