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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधने के हैं कई फायदे, जानिए किस कलाई में बांधा जाता है रक्षासूत्र

Sun, 03 Aug 2025 01:16 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर बांधा हुआ रक्षासूत्र संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। शास्त्र मत है कि रक्षासूत्र बांधने से त्रिदेव ब्रह्मा,विष्णु और महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी,दुर्गा और सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।
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रक्षाबंधन 2025 - फोटो : Freepik
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विस्तार
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Raksha Bandhan 2025: हिंदू धर्म में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व होता है। वैसे तो किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, मांगलिक कार्य और पूजा-पाठ के दौरान कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा होती है। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार का विशेष महत्व होता है। इसमें बहनों के द्वारा अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने की विशेष महत्व होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के आपसी प्रेम और समर्पण का  पर्व है, जो हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 09 अगस्त को है। इस दिन बहनें अपनी भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।
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हिंदू धर्म में  कोई भी धार्मिक अनुष्ठान रक्षासूत्र जिसे राखी, कलावा और मौली भी कहते हैं उसके बिना संपन्न नहीं होता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करते समय या नयी वस्तु खरीदने पर हम  कलावा जरूर बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में सुख-सौभाग्य प्रदान करे। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर बांधा हुआ रक्षासूत्र संकल्प, रक्षा एवं विश्वास का प्रतीक माना जाता है। शास्त्र मत है कि रक्षासूत्र बांधने से त्रिदेव ब्रह्मा,विष्णु और महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी,दुर्गा और सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।

ब्रह्मा की अनुकंपा से कीर्ति और विष्णु की कृपा से रक्षा बल मिलता है तथा महेश दुर्गुणों का विनाश करते हैं। इसी प्रकार लक्ष्मी से धन, दुर्गा से शक्ति एवं प्रशासन करने की क्षमता और सरस्वती से ज्ञान की प्राप्ति होती है। उल्लेख आता है कि कलाई पर रक्षासूत्र बाँधने की परंपरा तबसे चली आ रही है जब से दान देने में अग्रणी राजा बली की अमरता के लिए श्री विष्णु अवतार वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बाँधा था। वेदों में उल्लिखित है कि वृत्रासुर से युद्ध करने जाते समय इंद्राणी शची ने इंद्र की दाहिनी भुजा पर रक्षासूत्र बांधा था,जिससे वृत्रासुर को मार कर इंद्र विजयी हुए थे।
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किस कलाई में बांधे राखी और नियम
शास्त्रों के अनुरूप पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में रक्षासूत्र बाधना चाहिए एवं विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बाँधने का विधान है। कलावा बंधवाते समय उस हाथ की मुट्ठी को बंद रखकर दूसरा हाथ सिर पर रखना चाहिए । कलावे का बांधा जाना हमें उस संकल्प को याद करते रहना तथा उसकी पूर्ती के लिए प्रयास करते रहना सिखाता है । मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हाथ में कलावा बंधे होने से व्यक्ति को स्वयं ही परमात्मा द्वारा अपनी रक्षा होने का आभास  होता है। जिससे  मन में शांति व आत्मबल में वृद्धि होती है। व्यक्ति के मन -मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते ।
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रक्षाबंधन 2025 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 08 अगस्त को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से हो जाएगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 9 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 24 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 09 अगस्त, शनिवार के दिन मनाया जाएगा। 

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रक्षाबंधन 2025 शुभ मुहूर्त 
ब्रह्रा मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 22 मिनट से 05 बजकर 04 मिनट तक 
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक
सौभाग्य योग- सुबह 04 बजकर 08 मिनट से लेकर 10 अगस्त को तड़के 2 बजकर 15 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- 09 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक

रक्षाबंधन 2025 चौघाड़िया मुहूर्त 
लाभ काल- सुबह 10 बजकर 15 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजे तक
अमृत काल- दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से लेकर 3 बजे तक
चर काल- शाम 4 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 06 बजे तक

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