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Pradosh Vrat July 2021: बुध प्रदोष व्रत आज, इस मुहूर्त में करें भगवान शिव की आराधना

Wed, 21 Jul 2021 09:19 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर माह में दो बार त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है और आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।
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प्रदोष व्रत जुलाई 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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Pradosh Vrat July 2021: आज बुध प्रदोष व्रत है। बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर माह में दो बार त्रयोदशी (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में) तिथि के दिन रखा जाता है और आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी संध्या के समय की जाती है। यह व्रत फलाहार या निर्जल रहकर किया जाता है।

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प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 44 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक। 
निशीथ काल- मध्यरात्रि 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक। 
गोधूलि बेला- शाम 7 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक। 
अमृत काल सुबह 10 बजकर 27 मिनट से 11 बजकर 55 मिनट तक।
ब्रह्म मुहूर्त- अगले दिन सुबह 4 बजकर 14 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक।

प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी के दिन जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।

भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।

प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। इस व्रत को रखने वाले भक्तों के जीवन से दु:ख दरिद्रता भी दूर होती है।

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