ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एकादशी, अमावस्या, और पूर्णिमा जैसे शुभ दिनों पर भगवान विष्णु की आराधना और उनके मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है। मार्गशीर्ष मास को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय मास माना गया है। इस महीने में की गई पूजा-अर्चना, जप-तप और व्रत जीवन के दुखों को समाप्त कर मोक्ष के द्वार खोलने में सहायक होती है।
मार्गशीर्ष मास का महत्व
मार्गशीर्ष मास में आने वाली तिथियां जैसे अमावस्या, पूर्णिमा, और एकादशी, विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं। इनमें की गई पूजा-अर्चना भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने में मदद करती है। माना जाता है कि इस मास में भक्तों के सभी दुखों और कष्टों का अंत होता है, और उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति का अवसर मिलता है। इस दौरान भगवान विष्णु के खास मंत्रों और बीज मंत्र का जाप करने से विशेष फल मिलता है। यदि विधि विधान के साथ विष्णू जी की पूजा की जाए तो जीवन के सभी दुख खत्म हो जाते हैं। भगवान विष्णू के खास मंत्र और स्तुति कुछ इस प्रकार है...
भगवान विष्णु के खास मंत्र
भगवान विष्णु का बीज मंत्र
ॐ बृं
भगवान विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:
भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र
विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥१॥पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः।अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥२॥योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः।नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः॥३॥सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः।संभवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः॥४॥स्वयम्भूः शम्भुरदित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः।अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः॥५॥
आत्मयोनिः स्वयंजातो वैखानः सामगायनः।देवकीनंदनः स्रष्टा क्षितीशः पापनाशनः।।106।। शंखभृन्नंदकी चक्री शार्ङ्गधन्वा गदाधरः।रथांगपाणिरक्षोभ्यः सर्वप्रहरणायुधः।।107।।
सर्वप्रहरणायुध ॐ नमः इति।वनमालि गदी शार्ङ्गी शंखी चक्री च नंदकी।श्रीमान् नारायणो विष्णु: वासुदेवोअभिरक्षतु।
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