Pitru Paksha 2024: वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी गई है। पितृपक्ष में पितरों का आगमन दक्षिण दिशा से होता है। इसलिए दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त पूजा, तर्पण किया जाना अच्छा माना गया है।
Pitru Paksha 2024: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है जिसका समापन आश्विन माह की अमावस्या को होता है। मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के द्वारा ही पुत्र जीवन में पितृ ऋण से मुक्त हो सकता है। अतः पुत्र-पौत्रादि का यह कर्तव्य होता है कि वह पूर्वजों के निमित्त श्रद्धा पूर्वक ऐसे शास्त्रोक्त कर्म करें जिससे उन मृत प्राणियों को परलोक अथवा अन्य लोक में भी सुख प्राप्त हो सके।
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कैसे करें अपने पितरों का तर्पण
पितृपक्ष के दौरान पितरों के तर्पण में विशेष ध्यान देने योग्य कुछ महत्वपूर्ण वास्तु नियम हैं, जिनका पालन करने से तर्पण का लाभ अधिकतम होता है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
श्राद्ध के दिन घर का मुख्य द्वार स्वच्छ और आकर्षक होना चाहिए। मुख्य द्वार पर पुष्प और दीपक लगाना शुभ माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि को आमंत्रित करता है।
वास्तुशास्त्र में दक्षिण दिशा पितरों की दिशा मानी गई है। पितृपक्ष में पितरों का आगमन दक्षिण दिशा से होता है। इसलिए दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त पूजा, तर्पण किया जाना अच्छा माना गया है।
मान्यता है कि जिन्होंने शरीर धारण किया है चाहे वे पितृ हैं या गुरु हैं, जो देव तुल्य हो गए हैं उनकी पूजा सदैव दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम और पश्चिम दिशा में की जा सकती है,पूर्व,पूर्वोत्तर या उत्तर में नहीं, क्योंकि ये ईश की दिशा मानी गई है।
तर्पण के समय ऐसा स्थान चुनें जो शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर हो। स्थान को अच्छी तरह से साफ करें। स्वच्छता से तर्पण की क्रिया में दिव्यता और प्रभावशीलता बनी रहती है।
श्राद्ध कर्म के दिन ब्राहमण को भोजन कराने से पहले दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश, तिल और जल लेकर पितरों का तर्पण करें।
तर्पण के समय अग्नि को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इस दिशा में अग्नि संबंधित कार्य करने से हर क्षेत्र में विजय और सफलता मिलती है,रोग एवं क्लेश दूर होते है तथा घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
श्राद्ध भोज करवाते समय ब्राह्मण को दक्षिण की ओर मुख करके बिठाना चाहिए,ऐसा करने से पितृ संतुष्ट होकर प्रसन्न होते हैं।
श्राद्ध के दौरान घर में शांति और एकाग्रता बनाए रखें। किसी भी प्रकार की अशांति या झगड़े से बचें, क्योंकि इससे पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती और श्राद्ध का प्रभाव कम हो सकता है।
वास्तु की मान्यता है कि अपने पूर्वजों की तस्वीरों को भूलकर भी अपने बेडरूम,सीढ़ियों वाले स्थान और रसोई घर में नहीं लगाना चाहिए। माना जाता है कि इससे पारिवारिक कलह के साथ परिवार की सुख-शांति भंग होती है एवं घर में पितृ दोष हो सकता है।
पितरों की तस्वीर के लिए सबसे उपयुक्त दिशा मुख्य बैठक वाले कमरे की दक्षिण ,दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दीवार की तरफ लगाना ज्यादा लाभदायक होता है।