शास्त्रों में श्राद्ध करने की अनिवार्यता बताई गई है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म द्वारा पुत्र पितृ ऋण से मुक्त हो सकता है। इसलिए पुत्र-पौत्रादि को पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक ऐसे शास्त्रोक्त कर्म करने चाहिए, जिनसे उन मृत प्राणियों को परलोक या अन्य लोकों में भी सुख प्राप्त हो सके।
दिन के 12 बजे तक
जिस दिन आपके घर श्राद्ध तिथि हो, उस दिन सूर्योदय से लेकर दिन के 12 बजे तक ही श्राद्ध करने का प्रयास करें। इसके पहले ही ब्राह्मण से तर्पण आदि करा लें। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगा जल, मधु, वस्त्र, कुश, अभिजीत मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से अनिवार्य हैं। भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है, इसलिए इनका उपयोग श्राद्ध-कर्म में अति आवश्यक है। तुलसीदल से भी पिंडदान करने का विधान है। इससे भी पितर पूर्ण तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। इसलिए श्राद्ध कर्म में तुलसीदल भी शामिल करें। जब तक श्राद्ध कर्म न हो, कुछ ग्रहण न करें। कुशा के आसन पर स्वयं बैठें और ब्राहमण को बिठाएं। अगर स्वयं श्राद्ध कर्म करना हो तो आसन को जल से पवित्र करें। इस दिन निमंत्रित ब्राह्मण का पैर धोएं। इस कार्य के समय पत्नी दाहिनी तरफ हो।
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कुछ जरूरी कर्म
- ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए सामग्री पत्ते पर निकालें।
- गोबलि : गाय के लिए पत्ते पर ‘गोभ्ये नमः’ मंत्र पढ़कर भोजन निकालें।
- श्वानबलि : कुत्ते के लिए ‘द्वौ श्वानौ नमः’ मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
- काकबलि : कौवे के लिए ‘वायसेभ्यो नमः’ मंत्र पढ़कर पत्ते पर भोजन सामग्री निकालें।
- देवादिबलि : देवताओं के लिए ‘देवादिभ्यो नमः’ मंत्र पढ़कर और चीटियों के ‘पिपीलिकादिभ्यो नमः’ मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें। इसके बाद थाली या पत्ते पर ब्राह्मण को भोजन परोसें।
- दक्षिणाभिमुख होकर कुश, तिल और जल लेकर पितृतीर्थ से संकल्प करें और एक या तीन ब्राहमण को भोजन कराएं। भोजन के बाद यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसमें गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी और नमक का दान किए जा सकते हैं।
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इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। यह सरल उपाय श्रद्धापूर्वक करने से पितर तृप्त होते हैं और वे आशीर्वाद देने के लिए विवश हो जाते हैं। आपके कार्य व्यापार, शिक्षा अथवा वंश वृद्धि में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं।
इनसे करें परहेज
श्राद्ध तिथि वाले दिन तेल लगाने, दूसरे का अन्न खाने और स्त्री प्रसंग से परहेज करें। श्राद्ध में राजमा, मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हड़ा, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज-लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, कैथ, महुआ, चना आदि वस्तुएं वर्जित हैं।